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हमीरपुर में गेहूं की फसल पर पीले रतुआ का कहर, किसानों के माथे पर खींची लकीरें
Hamirpur News in Hindi

Jasbir Kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 24, 2020, 12:55 PM IST
हमीरपुर में गेहूं की फसल पर पीले रतुआ का कहर, किसानों के माथे पर खींची लकीरें
गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का अटैक.

कषि विभाग उपनिदेशक डॉ. कुलदीप सिंह वर्मा का कहना है कि पीला रतुआ बीमारी से निपटने के लिए विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है और बीमारी से निजात पाने के लिए दवाई छिडकाव के लिए बांट रहा है.

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हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में गेहूं (Wheat) की फसल (Crops) पर पीले रतुये ने कहर ढहना शुरू कर दिया है. इस कारण किसानों की सैंकड़ों कनाल भूमि पर बिजी गई गेहूं की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है. किसानों ने गेहूं की फसल की बिजाई के लिए हजारों रुपये खर्च किये, लेकिन पीले रतुआ के कहर ने किसानों (Farmers) के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने पर मजबूर कर दिया है. वहीं कृषि विभाग (Agriculture) की मानें तो जल्द ही पीले रतुआ रोग से गेहूं की फसल को बचाया जाएगा.

खेती करते हैं लोग
हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर लोग कृषि करके ही अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. किसान खून पसीने की कमाई के हजारों रुपये खर्च कर खेतों में फसलों की बिजाई करते हैं. किसानों ने इस बार भी गेहूं की फसल को बीजने के लिए हजारों रुपये के बीज व खाद डालकर खेतों में गेहूं की फसल को लगाया. लेकिन गेहूं की फसल पर पीला रतुआ ने अपना कहर बरसाना शुरू कर दिया है. इस कारण किसानों की लाखों रुपए की फसल को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है.

दो माह में ज्यादा कहर



कृषि विभाग के विशेषज्ञओं की माने तो पीला रतुआ पहाड़ों के तराई क्षेत्र में पाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह मैदानी क्षेत्रों में भी इस रोग ने पांव पसारने शुरू कर दिये हैं, जो गेहूं की फसल को नष्ट कर देता है. मैदानी क्षेत्रों में सामान्यत गेहूं की अगेती और पिछेती फसल को ज्यादा प्रभावित करता है. जनवरी और फरवरी माह में गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग लगने की अधिक संभावना रहती है. इस रोग में फफूंदी-फफोले पतियों पर पड़ जाते हैं. जो कि बाद में बिखर कर अन्य पतियों को भी ग्रसित कर देते हैं. गेहूं के पत्ते पीला होना ही पीला रतुआ रोग नहीं है, इसके कई कारण हो सकते हैं. पीला रतुआ बीमारी में गेहूं के पत्तों पर पीले रंग का पाउडर बनता है इससे छूने पर हाथ पीला हो जाता है. हिमाचल के निचले और गर्म क्षेत्रों में या रोग अधिक पाया जाता है. तापमान में वृद्धि के चलते गेहूं के रोग इजाफा होता रहता है. फसल के इस रोग की चपेट में आने से कोई पैदावार नहीं होती और किसानों को फसल से हाथ धोना पड़ता है. इस बीमारी के लक्षण पराए ठंडे और नमी वाले क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलते हैं.

ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में गेहूं (की फसल पर पीले रतुआ का कहर.
ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में गेहूं (की फसल पर पीले रतुआ का कहर.


किसानों ने सरकार से लगाई गुहार
किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि इस रोग से निपटने के लिए कृषि विभाग द्वारा जागरूक किया जाए और मुफ्त में कीटनाशक का खेतों में छिड़काव किया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक हानि न उठानी पड़े. कषि विभाग उपनिदेशक डॉ. कुलदीप सिंह वर्मा का कहना है कि पीला रतुआ बीमारी से निपटने के लिए विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है और बीमारी से निजात पाने के लिए दवाई छिडकाव के लिए बांट रहा है. उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि नजदीकी कषि केन्द्र में जाकर दवाई लेकर जल्द गेहूं की फसल में छिड़काव करें.

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First published: February 24, 2020, 12:55 PM IST
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