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हिमाचल में पंचायतें नहीं खर्च पाई 710 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास मंत्री हुए सख्त

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: December 4, 2019, 1:51 PM IST
हिमाचल में पंचायतें नहीं खर्च पाई 710 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास मंत्री हुए सख्त
हिमाचल में पंचायतों के पास 700 करोड़ से ज्यादा पैसा लंबित है.

पंचायतों की ओर से पैसे को खर्च करने में बरती जा रही लापरवाही पर सरकार सख्त हो गई है. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने सभी पंचायतों को पत्र लिखकर 31 मार्च तक पैसा खर्च करने के निर्देश दिए हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में विकास को गति देने में लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई फिसड्डी साबित हो रही है. पंचायतें 14 वे वित्तायोग से मिले धन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाई हैं. हालात यह है कि प्रदेश में करीब 710 करोड़ रुपये बिना खर्च पंचायतों (Panchyat Fund) के खाते में ही पड़ा है. दरअसल, पंचायतों को 14वें वित्तायोग के अलावा एमपी और एमएलए फंड का पैसा भी मिलता है, लेकिन किन्हीं कारणों से पंचायतें उन्हें खर्च करने में विफल रही हैं.

ज्वालामुखी से बीजेपी विधायक (BJP) और राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला (Ramesh Dhawala) ने इस मामले पर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाएं हैं. धवाला ने कहा कि उनके विकास खंड में ही 16 करोड़ रुपये पंचायतों के पास बिना खर्च के पड़े हैं. इस भी पंचायत में जाओ, वहां पर अनस्पेंट मनी है. पंचायतों ने करोड़ के शेल्फ मंजूर किए हैं लेकिन विकास की गति धीमी है. धवाला ने सुझाव दिया कि तकनीकी विंग के जरिए कुछ काम करवाया जाए और बड़ा काम ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से हो.

490 करोड़ रुपये इसी वर्ष मिला है, जबकि 220 करोड़ रुपये पुराना
ग्रामीण विकास विभाग के आकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 710 करोड़ रूपये पंचायतों के पास अनस्पेंट पड़ा है. हालांकि, इसमें 490 करोड़ रुपये इसी वर्ष मिला है, जबकि 220 करोड़ रुपये पुराना है. ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर ने इसकी पुष्टि की है. ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि हिमाचल को अब तक 1659 करोड़ रुपये 14वें वित्तायोग से मिले थे, जिसमें 948 करोड़ रुपये खर्च किया जा चुका है.

वीरेंद्र कंवर, पंचायती राज मंत्री, हिमाचल प्रदेश.
वीरेंद्र कंवर, पंचायती राज मंत्री, हिमाचल प्रदेश.


सरकार दिखा रही सख्ती
पंचायतों की ओर से पैसे को खर्च करने में बरती जा रही लापरवाही पर सरकार सख्त हो गई है. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने सभी पंचायतों को पत्र लिखकर 31 मार्च तक पैसा खर्च करने के निर्देश दिए हैं. अगर कोई पंचायत ऐसा नहीं करती है तो सरकार पैसे को विदड्रॉ भी कर सकती है. कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इस पैसे को पंचायतें मनरेगा के माध्यम से खर्च कर सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि टेंडर की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी, क्योंकि यह काम स्थानीय समितियों के माध्यम से होंगे. हालांकि, वित्तायोग के अलावा, जो अलग से बजट आता है उसे एक महीने के नोटिस के बाद टेंडर के जरिए करवाया जा सकता है. राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला के मामले पर वीरेंद्र कंवर ने कहा कि उनके ब्लॉक में अनस्पेंट 16 करोड़ रुपये में से 9 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. शायद आंकड़ों के अभाव में उन्होंने यह बात कही है.
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First published: December 4, 2019, 1:51 PM IST
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