लाइव टीवी

अब मौत से 24 घंटे पहले ही सुनाई दे जाएगी उसकी आहट, पहाड़ों में बचेंगी हजारो जानें


Updated: November 8, 2019, 10:43 AM IST
अब मौत से 24 घंटे पहले ही सुनाई दे जाएगी उसकी आहट, पहाड़ों में बचेंगी हजारो जानें
Mandi_Accelerometer landslide predictin device by IIT Mandi Himachal Pradesh

आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) की मदद से इसकी क्षमता विकसित करने की कोशिश की जा रही है. नए एल्गोरिदम (Algorithm) की मदद से एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) अब भूस्खलन की भविष्यवाणी 24 घंटे पहले ही कर देगा.

  • Last Updated: November 8, 2019, 10:43 AM IST
  • Share this:
मंडी. भारत के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide in Mountains) या जमीन धंसने की घटनाओं से हर साल सैकड़ों लोगों की जान (Death due to Landslide) जाती है. इससे निपटने के लिए आईआईटी मंडी (Indian Institute of Technology Mandi) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा यंत्र तैयार किया है जो भूस्खलन होने की (Device predicting Landslide) आहट आने के पहले ही इसके भविष्यवाणी कर देता है. फिलहाल यह यंत्र  हिमाचल प्रदेश में 20 जगहों पर काम कर रहा है. वैज्ञानिक अब इस तकनीक को और सटीक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) की मदद से इसकी क्षमता विकसित करने की कोशिश की जा रही है. नए एल्गोरिदम (Algorithm) की मदद से एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) अब भूस्खलन की भविष्यवाणी 24 घंटे पहले ही कर देगा. उम्मीद की जा रही है कि इसे अगले साल 2020 मानसून (Monsoon 2020) से पहले विकसित कर लिया जाएगा.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे बनाने वाले वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि प्राकृतिक आपदा के समय होने वाले जान माल के नुकसान को यह यंत्र काफी हद तक कम कर देगा. किसी मोबाइल फोन के ऐप की तरह इस यंत्र से जमीन के अंदर होने वाली छोटी से छोटी हरकत दर्ज की जा सकेगी. यह यंत्र इस तरह के दूसरे भूस्खलन मापने की तकनीक से बेहद सस्ता है. इसकी कीमत मात्र बीस हजार रुपए है.

लगातार बढ़ रही चुनौती

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाके में भूस्खलन आम बात है. हिमालय पर्वत श्रृंखला की अस्थिरता की वजह से बारिश के मौमम में पहाड़ धंसना एक बड़ी समस्या बन जाती है. यह न केवल जान माल का नुकसान करता है बल्कि राहत कार्य में भी अड़चन उत्पन्न करता है. लगातार बढ़ते शहरीकरण पेड़ों की कटाई और जलवायु परिवर्तन से अत्यधिक बारिश ने इस समस्या को और विकराल कर दिया है.

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी इलाके में वाहनों के आवागमन और यात्रियों की संख्या बढ़ने से दुर्घटना होने पर क्षति का पैमाना बढ़ गया है. हिमाचल के अंदरुनी इलाकों में जनसंख्या बढ़ोतरी की वजह से रोजमर्रा की आवश्यकता भी अधिक हो गई है. इसे ढोने के लिए मालवाहक गाड़ियों की भी संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है. भूस्खलन होने से रास्ते बंद हो जाते हैं या उखड़ जाते हैं. पहले ही पहाड़ों पर आवागमन बेहद दुर्गम होता है.

Landslide
यहां के लोगों को हमेशा कभी भी बड़ा हादसा होने का भय सताता रहता है.

Loading...

इसका अविष्कार करने वाले वैज्ञानिकों डॉ. वरुण दत्त और डॉ. केवी उदय ने बीबीसी को बताया कि उनके यंत्र में मिट्टी की हरकत पर नजर रखने के लिए मोशन सेंसर का उपयोग किया जा रहा है. पहाड़ की मिट्ट पर जब कहीं से दबाव पड़ता हो तब वह हरकत करती है. इस हरकत को एक्सेलरोमीटर तुरंत दर्ज कर लेता है. यंत्र से पहले संदेश भेजा जाता है और यदि दबाव बढ़ता हो तो फिर हूटर के रुप में अलार्म बज उठता है.

खतरे का संकेत मिलते ही प्रशासन हरकत में आ जाता है. भूस्खलन की संभावना वाले इलाके को बंद कर उसकी रोकथाम की जाती है. हालही में कोटरोपी ऐसे ही भूस्खलन की चेतावनी मिलने के बाद सड़क रोककर जानमाल की रक्षा की गई. अगस्त 2017 में यहां भूस्खलन  की वजह से 48 लोगों की मौत हो गई थी.

एक्सेलरोमीटर की मदद से आईआईटी के वैज्ञानिक किसी कमजोर पहाड़ के विषय में एलर्ट मिलने पर प्रशासन को आगाह कर रहे हैं. अब प्रशासन को पहले से इस बात का इल्म रहता है कि कौन से इलाके कमजोर मिट्टी वाले हैं या कहां मिट्टी के अंदर हरकत दर्ज की जा रही है.

ये भी पढ़ें:

चीन ने बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत छुड़ाने के लिए उठाया ये कदम

आपकी कार से होने वाला प्रदूषण ही अब बनेगा ईंधन, वैज्ञानिक ने बनाई तकनीक

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मंडी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 8, 2019, 10:43 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...