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लाहौल घाटी के इन गांवों में पेयजल संकट, डेढ़ किमी. पीठ पर उठाकर लाते हैं पानी

लाहौल घाटी के इन गांवों में पेयजल संकट, डेढ़ किमी. पीठ पर उठाकर लाते हैं पानी

गंदला पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

गंदला पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

लाहौल घाटी के जोबरंग पंचायत का तीन गांव रापे, राशेल और जोबरंग में पेयजल संकट से गुजर रहा है. बर्फबारी के बाद इन गांवों के लोगों को चिनाब नदी का रेतीला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है.

    हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के जोबरंग पंचायत का तीन गांव रापे, राशेल और जोबरंग में पेयजल संकट से गुजर रहा है. बर्फबारी के बाद इन गांवों के लोगों को चिनाब नदी का रेतीला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है. इन गांव के लोगों को पीने के पानी का संकट केवल सर्दियों में ही नहीं सताता है, बल्कि गर्मियों में भी इन्हें पानी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है. यहां के लोगों को गर्मियों में में करीब डेढ किलोमीटर दूर से पीठ पर ढो कर पीने का पानी लाना पड़ता है.

    लाहौल घाटी के इन गांवों की कोई सुध लेने को तैयार नहीं है. यहां के लोगों को अभी भी स्थाई व सुचारू पेयजल के तरसना पड़ रहा है. कई मौसम आए और बदल गए, कई सरकारें आई और चली गईं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस पंचायत के तीन गॉवों के लोगों के भाग्य में पेयजल की लकीर नही खींची गई है.

    इन दिनों इन गांव के लोगों को चिनाब नदी से रेतीली पानी पीठ पर ढो कर लाने में हिमस्खलन का खतरा भी सताता रहता है.

    (केलांग से प्रेम लाल की रिपोर्ट)

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    Tags: Himachal pradesh, Keylong, Water Crisis

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