लाहौल घाटी में सिकुड़ रही है फूलों की खेती, ये है वजह

एक प्रगतिशील किसान का कहना है कि यातायात, विपणन, कोल्ड स्टोरेज जैसी समस्याओं के चलते फूल उत्पादक अपने उत्पाद सही समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पाते हैं. इसके चलते उन्हें उनके फूलों के सही दाम नहीं मिल पाते हैं.

News18 Himachal Pradesh
Updated: August 29, 2019, 7:31 PM IST
लाहौल घाटी में सिकुड़ रही है फूलों की खेती, ये है वजह
लाहौल घाटी में सरकार की अनदेखी के चलते किसानों का फूलों की खेती से हो रहा है मोहभंग
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Updated: August 29, 2019, 7:31 PM IST
शीत मरुस्थल के नाम से विख्यात लाहौल घाटी जलवायु के हिसाब से फूलों की खेती (Flower farming) के लिए उपयुक्त पाया गया है. इसके चलते तिनन व पटटन घाटी के प्रगतिशील किसानों ( Progressive farmers) ने एक दशक पहले फूलों की खेती को अपना व्यवसाय बनाया है. हालांकि घाटी में सड़क मार्ग, दूरसंचार, विपणन, सीमित अवधि तथा भंडारण समेत अनेक चुनौतियां सामने हैं. इसके बाबजूद साहसिक व प्रगतिशील किसान विश्व स्तर के फूलों का उत्पादन (Production of world class flowers) कर रहे हैं. विशेषकर लिलियम व एशियाटिक जैसे फूल बेहद कामयाब हैं. ये फूल विश्व स्तर के हैं.



लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते घाटी के किसान धीरे धीरे अपना हाथ इस पेशे से खींच रहे हैं. इसके चलते इस खेती का क्षेत्रफल साल दर साल कम होता जा रहा है.

थोरंग गांव के प्रगतिशील किसान लाल सिंह का कहना है कि यातायात, विपणन, कोल्ड स्टोरेज जैसी समस्याओं के चलते फूल उत्पादक अपने उत्पाद सही समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पाते

हैं. इसके चलते उन्हें उनके फूलों के सही दाम नहीं मिल पाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है ताकि बेरोजगार युवा इस पेशे को विकल्प के तौर पर अपना सकें.

(केलांग से प्रेम लाल की रिपोर्ट)

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First published: August 29, 2019, 7:25 PM IST
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