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दिनभर इंतजार करते रहे रोहतांग दर्रा के लोग, उनको लेने नहीं आया हेलीकॉप्टर

लाहौल घाटी के रावा, चोखंग जैसे हेलीपैड से सीजन में अभी तक एक भी हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर पाया है.

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सर्दी के दिनों में जनजातीय विभाग द्वारा चलाई जाने वाली हेलीकॉप्टर सेवा लाहौल-स्पीति के लोगों के लिए जीवन रेखा की तरह होती है. रोहतांग दर्रा दिसम्बर महीने से वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद हो जाता है. यहां के लोगों के लिए देश-दुनिया से जुड़ने का एक मात्र सहारा हेलीकॉप्टर सेवा है, लेकिन इस साल हेलीकॉप्टर सेवा न के बराबर होने से सितंगरी हेलीपैड के सवारियों की संख्या ढ़ाई सौ का आंकड़ा पार कर गई है. यहीं हाल घाटी के बाकी हेलीपैड का भी है.

सीजन में अभी तक लाहौल घाटी के रावा, चोखंग जैसे हेलीपैड से एक भी हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया है. कहा जा रहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर शेड्यूल निर्धारित की जा रही है, लेकिन लाहौल घाटी के लिए निर्धारित शेड्यूल में मौसम अकसर खराब रहता है.

हाल ही में सितंगरी भून्तर के लिए दूसरी शेड्यूल निर्धारित की गई थी. सवारी केलांग तथा दूरदराज इलाकों से जैसे-तैसे सितंगरी हेलीपैड भी पहुंची. यात्री दिन भर हेलीकॉप्टर का इन्तजार करते रहे और शाम साढ़े चार बजे लाइजन अधिकारी ने हेलीकॉप्टर उड़ान रद्द होने की सूचना दी.



इन यात्रियों में ऐसे लोग भी थे जिन्होंने जनवरी में आवेदन पत्र दिया था. बड़ी मुश्किल से उनका नम्बर लगा था, लेकिन उड़ान रद्द कर दी गई. घाटी के लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सितंगरी हेलीपैड समेत घाटी में तमाम हेलीपैडों से प्राथमिकता के आधार पर हेलीकॉप्टर की उड़ाने सुनिश्चित की जाएं.
(केलांग से प्रेमलाल की रिपोर्ट)

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