कुल्लू में मजदूर संघों की मांग - आउटसोर्स व ठेका कर्मचारियों की नियुक्त पर तुरंत रोक लगाए सरकार
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कुल्लू में मजदूर संघों की मांग - आउटसोर्स व ठेका कर्मचारियों की नियुक्त पर तुरंत रोक लगाए सरकार
कुल्लू में प्रदर्शन करते विभिन्न संघों के लोग.

ज्ञापन में सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करना और श्रमिक कानूनों को निलंबित करने जैसी कार्यवाही के लिए सरकार की आलोचना की गई है. प्रधानमंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने और लॉकडाउन अवधि के वेतन के मुद्दे उठाए गए हैं.

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कुल्लू. भारतीय मजदूर संघ, विद्युत तकनीकी कर्मचारी संघ, परिवहन मजदूर संघ और प्राइवेट मजदूर संघ ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री (Prime Minister) व मुख्यमंत्री (Chief Minister) को ज्ञापन भेजा है. यह जानकारी हिमाचल प्रदेश मजदूर संघ के प्रदेश कार्यकारिणी एवं जिला सचिव अशोक वर्मा ने दी. उन्होंने कहा कि ज्ञापन मे केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई गई है. साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करना और श्रमिक कानूनों को निलंबित करने जैसी कार्यवाही के लिए सरकार की आलोचना की गई है. प्रधानमंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने और लॉकडाउन अवधि के वेतन के मुद्दे उठाए गए हैं.

अशोक वर्मा ने कहा कि श्रमिकों के मौलिक मुद्दों की बात करते हुए असंगठित एवं प्रवासी मजदूरों के आर्थिक व रोजगार संबधी समस्या के समाधान करने की गुजारिश भी प्रधानमंत्री से की गई है. ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि लॉकडाउन अवधि के वेतन का भुगतान किया जाए, वेतन में की गई कटौतियां वापस ली जाएं. सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण सरकार बंद करने को कहा गया है. आग्रह किया गया है कि सरकार नए रोजगार सृजित करे. परिवहन सेवा के विभिन्न मुद्दों को लेकर, जिसमें राष्ट्रीय परिवहन नीति भी शामिल है, ज्ञापन में लिखा गया है. राज्य परिवहन कर्मचारियों को राज्यकर्मी घोषित करने की भी मांग की गई है और वेतन भत्ते और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिलाभ का भुगतान समय पर करने की मांग की गई है.

ज्ञापन के जरिए सरकार से मांग की गई है कि ठेका कर्मियों को नियमित करें. विद्युत विभाग में राष्ट्रीय नीति तैयार करें. विद्युत बिल वितरण में निजी क्षेत्र का प्रवेश बंद करें. विद्युत सुधार कानून 2003 के वर्तमान स्थिति को लेकर श्वेत पत्र जारी करें. आउटसोर्सिंग व ठेका कर्मियों पर तुरंत रोक लगाई जाए. निजी परिवहन कर्मियों के लिए कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाए. सभी प्रकार के वाहनों के बीमार, टैक्स, परमिट, फिटनेस, लाइसेंस ए वर्ष के लिए बढ़ाए जाएं. सभी निजी वाहन चालकों के बैंक लोन पर ब्याज छूट दी जाए और हर माह 5 सौ रुपये आर्थिक सहायता दी जाए. देश के सभी वाहन चालकों को ईएसआईसी के दायरे में लाया जाए.
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