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हिमाचल: कश्मीर की तर्ज पर सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग, किसान संघ का जोरदार प्रदर्शन

कुल्लू में किसान संघ ने जम्मू कश्मीर की तर्ज पर सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है.

कुल्लू में किसान संघ ने जम्मू कश्मीर की तर्ज पर सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है.

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सेब का समर्थन मूल्य जम्मू कश्मीर की तर्ज पर करने की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ ने DC कार्यालय के सामने जमकर प्रदर्शन किया. उन्होंने सेब पर समर्थन मूल्य 25 रुपये अधिक निर्धारित करने की मांग की है.

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कुल्लू. भारतीय किसान संघ का कृषि उत्पादों पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन चल रहा है. इसी सिलसिले में कुल्लू जिला में भी ढालपुर मैदान से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक भारतीय किसान संघ के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया. उन्होंने उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को संबोधित मांग पत्र सौंपा. इसमें जम्मू कश्मीर की तर्ज पर ए ग्रेड पर 65 से 70 और बी ग्रेड पर 35 से 40 रुपये मूल्य बागवानों को मिले. साथ ही हिमाचल प्रदेश में सेब का समर्थन मूल्य 25 रूपये निर्धारित किया जाए. दूध का न्यूनतम मूल्य 50 रुपये किया जाए. सरकार किसानों, टमाटर, गोभी इत्यादि सब्जियों का न्यूनतम मूल्य भी घोषित करे.

इसके साथ ही किसान संघ के मांग पत्र में नदियों  के अवैध खनन पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाने की मांग, बेसहारा पशुओं और बंदरों के द्वारा खेती को बचाने के लिए गौ सेंचुरी और बंदर सेंचुरी बनाने की मांग,  प्राकृतिक आपदाओं से किसानों, बागवानों को होने वाले नुकसान के लिए अलग से विशेष विभाग अधिकारी नियुक्त कर उचित मुआवजा दिया जाए, बाजार मध्यस्त योजना में किसानों, बागवानों के फल का भुगतान बैंक खातों में व्यवस्था की जाए शामिल रहीं.

किसान संघ ने कहा- किसानों को मिले समर्थन मूल्य का लाभ 
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री उमेश सूद ने बताया कि कि पूरे देशभर में भारतीय किसान संघ किसानों कृषि उत्पादों पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि कृषि उत्पादों पर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य निर्धारित किया जाए. सरकारें MSP की बातें करती हैं, जिसका फायदा प्रदेश के 6 से 7% किसानों-बागवानों को मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में घोषित समर्थन मूल्य के अंतर्गत नकद फसलें 23 आती हैं, लेकिन एक भी किसानों बागवानों की फसलें नहीं आती हैं.

80 फीसदी लोग बागवानी पर निर्भर 

उमेश सूद ने कहा कि प्रदेश में 80% लोग बागवानी और किसानी पर निर्भर हैं, ऐसे में सेब के इलावा प्रदेश में सब्जियों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है. साथ ही कई फलदार फसलें हैं, जिसमें अनार नाशपाती, आड़ू, खुरमनी जैसी कई नकदी फसलें कब आ रहे हैं. ऐसे में लगातार इन फसलों को उगाने के लिए लागत बढ़ रही है. जिससे किसानों को उत्पादों के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकार ने सेब और 9 रुपये 50 पैसे समर्थन मूल्य निर्धारित किया है. जबकि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में सेब का समर्थन मूल्य ₹25 से लेकर ₹60 तक ग्रेट बॉइज बागवानी को समर्थन मूल्य मिलता है. इस बार हिमाचल प्रदेश में सेब की बंपर फसल हुई है. इसलिए प्रदेश सरकार को किसानों बागवानों की उत्पादों को लेकर समर्थन मूल्य निर्धारित करना चाहिए, जिससे किसानों बागवानों लागत मूल्य से दोगुना लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए.

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