घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देता है हिमाचल का यह मंदिर

ऐसी मान्‍यता है कि द्वापरयुग में पांडवों के समय में बने इस शंगचूल महादेव मंदिर में आग लगने की घटना के बाद एक बार फिर से इसका निर्माण करवाया गया. इस मंदिर को लेकर काफी सख्त नियम हैं.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 15, 2019, 11:17 AM IST
घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देता है हिमाचल का यह मंदिर
कुल्लू का शंघचूल महादेव मंदिर.
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Updated: July 15, 2019, 11:17 AM IST
उत्तर प्रदेश के बरेली के भाजपा विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा और अजितेश की शादी का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है. दोनों ने परिजनों की रजामंदी के खिलाफ शादी की है. ऐसे में यह मुद्दा लगातार चर्चा में है, लेकिन आज हम आपको हिमाचल के ऐसे मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं जहां घर से भागे हुए प्रेमी जोड़ों को आसरा दिया जाता है.

हिमाचल का कुल्लू देवी-देवताओं की भूमि है. यहां घर से भागनेवाले प्रेमी जोड़ों को सिर छुपाने के लिए न केवल आसरा मिलता है, बल्कि उन्हें सुरक्षा भी मुहैया करवाई जाती है.

कुल्लू का शंघचूल मंदिर.
कुल्लू का शंघचूल मंदिर.


शंगचूल महादेव मंदिर में मिलती है शरण

हिमाचल के कुल्लू के शांघड़ गांव में महाभारत काल के शंगचूल महादेव मंदिर में घर से भागे हुए प्रेमी जोड़ों को शरण मिलती है. माना जाता है कि यहां आने के बाद प्रेमी जोड़े खुद को काफी सुरक्षित महसूस करते हैं. शंगचूल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र में करीब 100 बीघा का मैदान है. जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी जोड़ा पहुंचता है, वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है. जब तक वह इस मंदिर की सीमा में रहते हैं, तब तक उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. इतना ही नहीं मंदिर का रखरखाव करने वाले लोग प्रेमी जोड़ों की खातिरदारी करते हैं.

ये है मान्यता
इस मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए ठहरे थे. उनका पीछा करते हुए कौरव भी वहां पहुंच गए. तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि ये मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. महादेव के डर से कौरव वहां से लौट गए थे. उस वक्‍त से ही ऐसी मान्‍यता है कि जब भी समाज से ठुकराया हुआ या फिर कोई प्रेमी जोड़ा घर से भागकर महादेव की शरण में आता है तो भगवान शिव उनकी रक्षा करते हैं.
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पांडव कालीन इस मंदिर के नियम हैं काफी सख्त
साल 2015 में आधी रात के वक्त अचानक मंदिर में आग लग गई थी, जिसकी चपेट में 20 मूर्तियां और 3 मकान भी आ गए थे. द्वापरयुग में पांडवों के समय में बने इस शंगचूल महादेव मंदिर में आग लगने की इस घटना के बाद एक बार फिर से इसका निर्माण करवाया गया. इस मंदिर को लेकर काफी सख्त नियम हैं. गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है. इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट, हथियार और चमड़े का सामान लेकर आना मना है.

शंघचूल मंदिर में प्रेमी जोड़ों को आश्रय दिया जाता है.


महादेव का फैसला मान्य
यहां न तो कोई किसी प्रकार का झगड़ा कर सकता है और ना ही ऊंची आवाज में बात करने की इजाजत है. इस मंदिर में सिर्फ महादेव का ही फैसला मान्य होता है. गौरतलब है कि जिन युवाओं को शंगचूल महादेव मंदिर की महिमा के बारे में जानकारी है वो अपने प्रेमी या प्रेमिका के साथ भागकर महादेव की शरण में जा पहुंचते हैं, जहां स्वयं भगवान उनकी रक्षा करते हैं.

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Disclaimer:  इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन्हें प्रयोग में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क अवश्य करें.
First published: July 15, 2019, 10:18 AM IST
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