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कुल्लू: बसंत पंचमी पर भगवान रघुनाथ की भव्य रथ यात्रा के साथ होली उत्सव का हुआ आगाज
Kullu News in Hindi

Tulsi Bharti | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 30, 2020, 6:14 PM IST
कुल्लू: बसंत पंचमी पर भगवान रघुनाथ की भव्य रथ यात्रा के साथ होली उत्सव का हुआ आगाज
कुल्लू में ढालपुर मैदान में निकाली गई रघुनाथ की भव्य रथयात्रा

कुल्लू (Kullu) के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में बसंत पंचमी (Basant Panchami) के अवसर पर भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई. इसी के साथ कुल्लू में होली उत्सव (Holi festival) का आगाज हो गया.

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कुल्लू. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू (Kullu) के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में बसंत पंचमी (Basant Panchami) के अवसर पर भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई. इसी के साथ कुल्लू में होली उत्सव (Holi festival) का आगाज हो गया. लिहाजा कूल्लू में आज से 40 दिनों तक रघुनाथ की नगरी में होली मनाई जाएगी और भगवान रघुनाथ को हर दिन गुलाल लगाया जाएगा. साथ ही कुल्लू में ब्रज की होली के गीत भी गूंजेंगे. भगवान रघुनाथ सुलतानपुर स्थित अपने मंदिर से पालकी में बैठकर सैंकड़ों भक्तों के साथ ढोल नगाड़ों, वाद्य यंत्रों की थाप पर ढालपुर स्थित रथ मैदान तक पहुंचे, जहां से वह रथ में सवार होकर हजारों लोगों की मौजूदगी में अस्थाई शिविर तक रथ यात्रा द्वारा पहुंचें. इस दौरान राम भक्त और आम लोगों ने जय श्रीराम का घोष किया. इस रथ यात्रा के साथ ही कुल्लू के होली उत्सव का आगाज हो गया है.

40 दिनों तक होली स्वरूप चढ़ाया जाएगा अधिष्ठाता रघुनाथ को गुलाल

पूरे देश में अभी होली के पर्व को 40 दिन शेष है लेकिन भगवान रघुनाथ की नगरी कुल्लू में रघुनाथ की इस रथ यात्रा के साथ ही होली का पर्व शुरू हो गया है. इस दौरान राम-भरत मिलन आकर्षण केंद्र रहा. राम भरत मिलन के दृश्य को देखकर भक्त भाव विभोर हो गए. यह रथ यात्रा वीरवार को रथ मैदान से शुरू हुई जो रघुनाथ के अस्थायी शिविर ढालपुर मैदान तक निकाली गई. इस दौरान भगवान के रथ को खींचने और स्पर्श करने के लिए हजारों लोगों में होड़ लगी रही. इस दौरान अधिष्ठाता को देव विधि से गुलाल फेंका गया.

भव्य रथयात्रा में ढोल नगाड़ों के साथ शामिल हुए हजारों भक्त
भव्य रथयात्रा में ढोल नगाड़ों के साथ शामिल हुए हजारों भक्त


देश की होली से एक दिन पहले कुल्लू में मनाई जाएगी बड़ी होली

आज से आने वाले 40 दिनों तक भगवान रघुनाथ को सुल्तानपुर स्थित मंदिर में हर रोज गुलाल उड़ाया जाएगा. इस दौरान होली से 8 दिन पूर्व ही यहां होलाष्ठक पर्व शुरू हो जाएगा और देश की होली से एक दिन पूर्व ही होली मनाई जाती है. इस बार भी इस परंपरा का निर्वाहन किया जा रहा है. आज भी जिन स्थानों में भगवान रघुनाथ की मूर्ति है, वहां बैरागी समुदाय के लोगों की विशेष भूमिका रहती है. ढपली की धुनों पर यह होली के गीत गाना शुरू कर देते हैं .कुल्लू के साथ-साथ मणिकर्ण व नग्गर में भी बसंत पंचमी का आयोजन किया. कुल्लू के साथ-साथ मणिकर्ण व नग्गर में भी बसंत पंचमी का आयोजन किया.

होली उत्सव में वैरागी समुदाय के लोगों ने निभाई विशेष भूमिका40 दिनों तक चलने वाले होली उत्सव में वैरागी समुदाय के लोगों ने परंपरानुसा विशेष भूमिका निभाई. इतिहास बताता है कि कुल्लू जनपद में राजा जगतसिंह का शासनकाल वर्ष 1637 से 1662 तक रहा. इसी दौरान आयोध्या से भगवान राम की मूर्ति भी कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए यहां लाया गया था. उसके बाद यहां इस पर्व को मनाने की रिवायत शुरू हुई, इसलिए केसरी नंदन को लगे रंग को छूने की होड़ होती है. इस दौरान एक विशेष व्यक्ति हनुमान के भेष में आता है जो पूरे शरीर में केसरी रंग लेपकर आता है. लोगों का केसरी नंदन के साथ स्पर्श हो, इसके लिए लोग उसके पीछे भागते हैं। मान्यता है कि जिन लोगों को हनुमान का केसरी रंग लगता है तो उसकी मन्नतें पूरी होती है.

राम-भरत के मिलन को देख लोग हुए भाव विभोर

यात्रा के बाद रघुनाथ को पालकी में बैठाकर उनके मूल मंदिर सुल्तानपुर ले जाया गया. रथ यात्रा के दौरान ढालपुर में अदभुत नजारा देखने को मिला. हजारों की भीड़ के बीच जय श्रीराम का घोष करते हुए महिला पुरूष रघुनाथ के अस्थाई शिविर की ओर बढ़ रहे थे और लोगों ने भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने की भी उत्सुक्ता दिखाई दी. रस्सी के सहारे लोग रथ को रथ मैदान से अस्थाई शिविर तक ले गए, जहां प्रसाद भी बांटा गया. राम-भरत मिलन को देखकर स्थानीय लोगों के साथ साथ देश विदेश से आए हुए सैलानी भी भाव विभोर हुए.

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First published: January 30, 2020, 6:14 PM IST
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