Kullu: कसोल में एंट्री के लिए अब लगेगा बैरियर, कचरे से मुक्ति के लिए टूरिस्ट को देना होगा Green Tax

हिमाचल प्रदेश में कोरोना प्रतिबंधों में छूट के बाद मनाली के माल रोड पर पर्यटकों की भीड़. (पीटीआई)

Green Tax in Himachal: कसोल व मनीकर्ण में ठोस तथा तरल कचरे के उपयुक्त निष्पादन की मांग उठ रही है और इसके लिए धनराशि जुटाना आवश्यक है. पार्वती घाटी के प्रमुख क्षेत्रों में कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जाएंगे.

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कुल्लू. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण घाटी के कसोल (Kasol) में बैरियर लगेगा. यहां एंट्री करने पर टूरिस्ट से साडा विकास शुल्क (SADA Development Fee) वसूला जाएगा. इस राशि से क्षेत्रीय विकास के साथ ही कचरा निष्पादन संयंत्र लगाए जाएंगे. सैलानियों (Tourist) की सैरगाह घाटी में बुनियादी सुविधाओं का विकाश किया जाएगा. यह निर्णय साडा की बैठक में सभी सरकारी और गैर सरकारी सदस्यों ने सर्वसम्मति से लिया.

डीसी कुल्लू आशुतोष गर्ग ने बताया कि मणिकर्ण और कसोल पंचायत साडा के अंतर्गत आती है. इन दोनों पंचायतों में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से मूलभूत सुविधाओं के सृजन के लिए साडा विकास शुल्क लिया जाएगा.

कितना होगा शुल्क
डीसी ने कहा कि यह शुल्क हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के वाहनों से नहीं वसूला जाएगा. उपायुक्त ने कहा कि ‘साडा विकास शुल्क’ कितना होगा, इसका निर्धारण किया जा रहा है और कसोल से पहले किस स्थान पर शुल्क वसूली के लिए बैरियर स्थापित किया जाएगा, इसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन जल्द कर लिया जाएगा. इन सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए साडा के अधिकारियों ने कार्य शुरू कर दिया है.

बड़ी संख्या में आते हैं टूरिस्ट
आशुतोष गर्ग ने कहा कि पार्वती घाटी के कसोल, मनीकर्ण व आस-पास के दर्शनीय स्थलों पर हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. ये पर्यटक नदी-नालों के समीप खाद्य वस्तुओं के पैकेट हर कहीं पर फैंक देते हैं जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को बड़ा खतरा उत्पन्न हो रहा है. जगह-जगह पर कूड़ा-कचरा एकत्र होने के कारण क्षेत्र की सुंदरता में भी दाग लग रहा है और साथ ही सैलानियों के अलावा स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी नुकसान का कारण बन रहा है.

कचरे के निष्पादन के लिए राशि जुटाने की जरूरत
कसोल व मनीकर्ण में ठोस तथा तरल कचरे के उपयुक्त निष्पादन की मांग उठ रही है और इसके लिए धनराशि जुटाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि पार्वती घाटी के प्रमुख क्षेत्रों में कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इसके अलावा, सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी. एक बेहतर प्रबंधन करके देश-विदेश के पर्यटकों के माध्यम से प्रदेश की अच्छी छवि बाहर जाए, इस प्रकार के ढांचे का विकास किया जाएगा.

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