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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: 350 वर्ष के बाद पहुंचे 278 देवी-देवता, 8 बगैर निमंत्रण ही आए

Tulsi Bharti | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2019, 11:03 AM IST
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: 350 वर्ष के बाद पहुंचे 278 देवी-देवता, 8 बगैर निमंत्रण ही आए
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार देवी-देवताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई.

पिछले साल की भांति इस बार एक ओर जहां नए 26 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था. वहीं, इस बार पिछले वर्ष की भांति 40 देवी-देवता बढ़े.

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कुल्लू. अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा (International Kullu Dusshera) में इस बार देवी-देवताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई. पिछले 10 सालों से लगातार दशहरा उत्सव के लिए देवी-देवताओं (God) की संख्या से दशहरा उत्सव में ऐतिहासिक ढालपुर (Dhalpur) में रौनक लौट आई है. दशहरा उत्सव में प्रशासन के बिना निमंत्रण के भी देवी-देवता इस बार भी आए हैं. डेढ़ दशक की बात करें तो इस बार सबसे ज्यादा देवी-देवता दशहरा उत्सव में विराजमान हुए हैं. पिछले वर्ष जिला प्रशासन ने 305 और इससे पहले काफी वर्षों से 292 देवी-देवताओं को ही जिला प्रशासन की ओर से निमंत्रण भेजा जाता रहा है. इस बार जिला भर के 331 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था.

26 नए देवी-देवताओं को मिला निमंत्रण

पिछले साल की भांति इस बार एक ओर जहां नए 26 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था. वहीं, इस बार पिछले वर्ष की भांति 40 देवी-देवता बढ़े. उत्सव में 278 देवी-देवता पहुंचे हैं, पिछले वर्ष तक संख्या 238 थी. हालांकि, इस बार बिना निमंत्रण के तीन देवता भी अनूठे देव समागम में पहुंचे हैं.

Kullu Dusshera
पिछले साल की भांति इस बार एक ओर जहां नए 26 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था.


सन 1661 से देवी-देवता ले रहे उत्सव में भाग

बता दें कि 1661 के बाद वर्ष 2013 में पहली बार रिकॉर्ड देवी देवताओं ने दशहरा उत्सव में भाग लिया था. वैसे तो दशहरा उत्सव की शुरुआती वर्ष 1661 में जिला भर के 365 देवी-देवताओं के शिरकत करने से हुई थी, लेकिन उसके बाद देवी-देवताओं को दशहरा में आने की छूट दी गई. वर्ष 2004 में मात्र 101 देवी-देवता दशहरा उत्सव में आते थे, 2005 में इसकी संख्या घटकर 93 रह गई थी. इसके बाद देवी-देवता की संख्या बढ़ने लगी है.

कुल्लू दशहरे पर नहीं चढ़ा आधुनिकता का रंग
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इस उत्सव को देव महाकुंभ के नाम से देश और दुनिया में जाना जाता है. 1661 ईस्वी से लेकर आज तक कुल्लू जिले के देवी देवता दशहरा उत्सव में शिरकत करते आ रहे हैं. देवी-देवताओं के हारियानों की ना जाने कितनी पीढ़ियां बीत गई, लेकिन आज भी दशहरा उत्सव में आने के रिवाज को नहीं छोड़ा और ना ही इसे आधुनिकता के रंग में रंगने दिया.

देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने से जगह मुहैया कराने में आ रही है परेशानी

लिहाजा, देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने से भले ही जिला प्रशासन और दशहरा कमेटी को स्थान मुहैया करवाने में दिक्कतें आती हों, लेकिन कुल्लू का देव समाज उत्सव को और बढ़ावा देना चाहता है. हालांकि ढालपुर सिकुड़ जाने से आने वाले समय में देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने से स्थान मुहैया करवाने में समस्या आ सकती है.

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First published: October 11, 2019, 11:03 AM IST
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