कुल्लू दशहरा उत्सव: ना बाजार सजेगा, ना देवी-देवताओं का लगेगा जमावड़ा

कुल्लू में 25 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा.
कुल्लू में 25 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा.

Kullu Dussehra-2020: महेश्वर सिंह ने बताया कि कोरोना काल में बीमारी का असर भी है. डर भी है. ऐसे में दशहरा उत्सव में प्राचीन परंपरा किस प्रकार से निभाई जाएगी, इस पर चर्चा हुई है.

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कुल्लू. कोरोना काल (Corona Virus) में अंतराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में प्राचीन परंपराओं का निर्वहन का स्वरूप सुक्ष्म होगा. इसके लिए कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर (Govind Singh Thakur) की अध्यक्षता में देवसदन कुल्लू (Kullu) के सभागार में बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें दशहरा उत्सव समिति के सरकारी व गैर सरकारी सदस्यों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक में दशहरा उत्सव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है. इसमें कोविड-19 को लेकर नई गाइडलाइन के हिसाब से किसी भी धार्मिक कार्यक्रमों को मनाने के लिए 100 लोगों से अधिक लोग एक स्थान पर एकत्र न हो.

इसको लेकर उपायुक्त कुल्लू (DC Kullu) ऋचा वर्मा ने बैठक में दशहरा उत्सव को लेकर क्या स्वरूप होगा और इसको मनाने के लिए भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ी बरदार व कारदार संघ के सदस्यों से सुझाव मांगे. इसमें 2 घंटों तक चली बैठक में कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने सभी सदस्यों को चर्चा का मौका दिया.

प्राचीन पंरपराओं के निर्वहन करने का निर्णय
सभी ने प्राचीन पंरपराओं के निर्वहन करने का निर्णय लिया।वहीं बैठक में जिला परिषद सदस्य धनेश्वरी ठाकुर ने भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि जान है तो जहान है. ऐसे में प्राचीन परंपराओं का निर्वहन जरूरी है और कोरोना काल में आम जनमानस के जानमाल का नुकसान न हो, इसके लिए उन्होंने कहा कि इस बार दशहरा उत्सव सूक्ष्म तरीके से मनाया जाए. इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कोरोना के नियमों का पालन करते हुए दशहरा पर्व मनाया जाएगा.
बाजार नहीं सजेगा


इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ढालपुर मैदान में किसी भी तरह का व्यापार नहीं होगा और न ही कोई दुकानें लग पाएगी. दशहरा पर्व में आने वाले लोग कुल्लू शहर की स्थाई दुकानों में ही खरीददारी कर सकते हैं. यही नहीं, लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में भी किसी तरह का लोकनृत्य व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे. केवल दशहरा पर्व की परंपरा का निर्वाहन होगा. लिहाजा, इस बार कोरोना के कारण देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा पर्व का स्वरूप बिल्कुल अलग हो गया है. बैठक में दशहरा कमेटी के अध्यक्ष एवं शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने मख्य तौर पर भाग लिया. बैठक में विस्तार से चर्चा की गई कि आखिर किस तरह से कोरोना के इस संकट में दशहरा पर्व की परंपरा का निर्वाह किया जाए. कोरोना के नियमों को ध्यान में रखते हुए यही निर्णय लिया गया कि आखिर किसी भी देवी-देवता को आमंत्रित नहीं किया जाएगा. सिर्फ उन सात देवी-देवताओं के निशान बुलाए जाएंगे, जिन देवताओं की रथयात्रा में भूमिका जरूरी है.

बैठक में चर्चा की गई: मंत्री
निर्णय यह लिया गया कि यदि सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया तो कोविड-19 के नियमों की उल्लंघना होगी और कोरोना जैसी बीमारी पर कंट्रोल नहीं रहेगा. इसी को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्णय लिया गया कि दशहरा मैदान में व्यापार जैसी गतिविधियां भी नहीं की जाएगी. कैबिनेट मंत्री एंव चेयरमैन दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि दशहरा उत्सव मनाने के लिए बैठक में चर्चा हुई, जिसमें 25 अक्तूबर से 31 अक्तुबर दशहरा उत्सव मनाया जाएगा. प्राचीन परंपरा का निर्वहन करने के लिए सूक्ष्म से दशहरा मनाया जाएगा.

क्या बोले महेश्वर सिंह
महेश्वर सिंह ने बताया कि कोरोना काल में बीमारी का असर भी है. डर भी है. ऐसे में दशहरा उत्सव में प्राचीन परंपरा किस प्रकार से निभाई जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की दिशा निर्देशों पर भगवान रघुनाथ की रथयात्रा की प्राचीन परंपरा निर्वहन किया जाएगा. भगवान रघुनाथ की रथयात्रा 100 लोगों से खींची जा सकेगी. माता हडिम्बा, माता त्रिपुरासुंदरी, बिजली महादेव, ब्रह्रमा, लक्ष्मी नारायण, जम्दग्नि ऋषि, बीर नाथ देवी-देवताओं का विशेष परंपरा का निर्वहन करते हैं. उन्होंने लोगों से भी आग्रह किया कि इस बार सभी सहयोग करें और दशहरा उत्सव की रथयात्रा में कम लोग भाग लें.
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