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COVID-19: कुल्लू के ऐतिहासिक गांव मलाणा में कोरोना का एक भी केस नहीं

कुल्लू के मलाणा गांव में कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है.
कुल्लू के मलाणा गांव में कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

Kullu famous Malana Village: मलाणा गांव के ग्रामीणों ने ि‍पिछले साल मार्च में ही पर्यटकों के आगमन पर रोक लगा दी थी. इसके लिए बकायदा पंचायत हुई थी.

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कुल्लू. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू (Kullu) जिले में स्थित मशहूर गांव मलाणा (Malana Village) में कोरोना महामारी (Corona Virus) का नामोनिशान तक नहीं है. 2100 की आबादी वाली पंचायत में अभी तक एक भी कोरोना महामारी का मामला सामने नहीं आया है. बता दें कि यह गांव विश्वभर में प्रसिद्ध है.

दरअसल, यहां के लोगों ने मार्च 2020 के दूसरे सप्ताह में पर्यटन कारोबार को बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया था, जिसके बाद यहां पर पंचायत के चारों तरफ पहरा देकर बाहरी लोगों पर नजर रखी जाने लगी. पंचायत के अंदर बाहरी व्यक्तियों को घुसने नहीं दिया गया. इसका नतीजा यह निकला की गांव में कोरोना महामारी का एक भी मामला नहीं है. यहां के लोग धार्मिक प्रवृति के हैं. यहां पर देवता जम्दग्नि ऋषि, माता रेणुका और नरसिंह भगवान व आठरहा करड़ू का वास स्थान है. लोग इस महामारी की रोकथाम के लिए देवी-देवताओं का आशीर्वाद मान रहे हैं. मलाणा के लोगों ने कोरोना महामारी के खिलाफ एकजुटता के साथ सुझबूझ दिखाई है.





क्या बोले लोग
पूर्व पंचायत प्रधान भागे राम ने बताया कि कोरोना महामारी की रोकथाम को लेकर मलाणा पंचायत के प्रतिनिधियों, युवक मंडल, महिला मंडल और गांव कमेटी ने मार्च के दूसरे सप्ताह में ही निर्णय लिया था कि अगस्त तक पर्यटकों की आवाजाही पर रोक रहेगी. मलाणा के लोग भी जरूरी काम के लिए पंचायत के बाहर जा सकते थे. बिना कार्य के लोगों को पंचायत के बाहर जाने की अनुमति नहीं थी. गांव के लोगों ने पंचायत के चारों तरफ पहरा दिया. गांव में कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं आया.

मलाणा पंचायत की आशा वर्कर निरमा देवी ने बताया कि कोरोना महामारी को लेकर गांव कमेटी, युवक और महिला मंडल ने सामूहिक तौर पर निर्णय लिया और मार्च के बाद अगस्त तक एक भी पर्यटकों गांव में नहीं आया. गांव और पंचायत के लोगों ने सुझबूझ दिखाई. गांव में अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

चरस और सबसे पुराना लोकतंत्र
बता दें कि मलाणा गांव नशे की खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर चरस की खेती की जाती थी. वहीं, माना जाता है कि मलाणा गांव में दुनिया में सबसे पहले लोकतंत्र की स्थापना हुई थी. सिकंदर के सैनिकों ने इस गांव में शरण ली थी और बाद में इसे बसाया था. यहां बड़ी संख्या में हर साल टूरिस्ट आते हैं.
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