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प्रतिभा जम्बाल: जिन्होंने समदंर की गहराईयां नापी और INSV तारिणी से की दुनिया की परिक्रमा
Kullu News in Hindi

News18 Himachal Pradesh
Updated: March 5, 2020, 1:04 PM IST
प्रतिभा जम्बाल: जिन्होंने समदंर की गहराईयां नापी और INSV तारिणी से की दुनिया की परिक्रमा
हिमाचल के बेटी प्रतिभा जम्बाल को सम्मानित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद. (FILE PHOTO)

इंजीनियरिंग के समय कॉलेज में इंडियन नेवी की टीम ने कार्यशाला करवाई तो नौसेना में जाने का रुचि हुई. सर्विस सिलेक्शन बोर्ड के एग्जाम में फर्स्ट डिवीजन में टॉप किया और उसके बाद इंडियन नेवी में शामिल हो गई.

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कुल्लू. बचपन में जब स्कूल जाते समय फौजियों से भरे ट्रक में सैनिकों को लेह-लद्दाख के लिए जाते हुए देखते थे तो उन्हें देख कर मन में रुचि पैदा हुई है कि सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करनी है. फिर क्या था, मेहनत की और प्रतिभा जम्बाल (Pratibha Jamwal) भारतीय नौसेना (Navy) में भर्ती हो गई. प्रतिभा के नाम नौसेना की उन 6 महिला अफसरों में शामिल हैं, जिन्होंने समंदर के जरिये दुनिया की परिक्रमा की थी. साल 10 सितंबर 2017 को 6 महिला अफसरों का यह दल INSV तारिणी के जरिये दुनिया की परिक्रमा करने निकला था.

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कुल्लू जिले की लेफ्टिनेट कमांडर प्रतिभा जम्वाल को पंद्रह अगस्त को नौसेना मेडल से सम्मानित किया गया है. इसके अलावा, प्रतिभा को देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान तेंजिन नोर्गे अवार्ड भी गिया गया है.

इस वजह से चर्चा में आई
कुल्लू की रहने वाली प्रतिभा जम्बाल इंडियन नेवी ने लेफ्टिनेंट कंमाडर हैं. दरअसल, नौसेना की 6 महिला अफसरों ने समंदर के जरिये दुनिया की परिक्रमा की थी. 10 सितंबर 2017 को 6 महिला अफसरों का यह दल INSV तारिणी के जरिए परिक्रमा पर निकला था. तारिणी को वर्तिका जोशी कमांड कर रही थीं. चालक दल के अन्य सदस्यों में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल, पी. स्वाति, लेफ्टिनेंट एस. विजया देवी, बी. ऐश्वर्या और पायल गुप्ता शामिल थीं. प्रतिभा जम्वाल कुल्लू जिला के मौहल की रहने वाली हैं.



10 सितंबर को 2017 को शुरू की थी यात्रा


10 सितंबर को 2017 को सागर परिक्रमा यात्रा रक्षा मंत्री निर्माला सीतारमन ने गोवा से रवाना किया था. यात्रा में पहले पड़ाव के 25 दिन के बाद न्यूजीलैंड पहुंचे और इस दौरान दक्षिणी प्रशांत महासागर में तूफान में 20 घंटे 30 मीटर लहरों के बीच मुसीबतों का सामना किया.

कुल्लू की बेटी प्रतिभा जम्वाल. (FILE PHOTO)
कुल्लू की बेटी प्रतिभा जम्वाल. (FILE PHOTO)


दूसरा पड़ाव फीनलैंड रहा
दूसरा पड़ाव में फीनलैंड के आयरलैंड रहा. ऑस्ट्रिया में 15 दिन तक रुके और इस दौरान वहां पर दीवाली मनाने के अलावा, वहां पर कई कार्यशला में हिस्सा लिया. उसके बाद साऊथ अफ्रीका में यात्रा का तीसरा पड़ाव था. जहां पर होली मनाई और वहां पर रह रहे भारतीयों से मिले. वापसी में मॉरिसस में बोट का स्टेरिंग टूट गया, यहां सात दिन के बाद रिपेयर बोट से यात्रा शुरू की.

पचास हजार किमी का सफर किया
पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने 254 दिन में करीब 50000 किलोमीटर का सफर तय किया. इस दौरान तीन तूफानों में 52 घंटे जंग लड़ी. कई बार तूफानों में बीच बोट में पानी आने इंजन बंद हुआ.

ऐसे मिली सेना में जाने की प्ररेणा मिली
प्रतिभा जम्बाल बचपन में जब स्कूल जाते समय फौजियों से भरे ट्रक में सैनिकों को लेह-लद्दाख के लिए जाते हुए देखती थी तो उन्हें देख कर मन में रुचि पैदा हुई है कि सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करनी है. इंजीनियरिंग के समय कॉलेज में इंडियन नेवी की टीम ने कार्यशाला करवाई तो नौसेना में जाने का रुचि हुई. सर्विस सिलेक्शन बोर्ड के एग्जाम में फर्स्ट डिवीजन में टॉप किया और उसके बाद इंडियन नेवी में शामिल हो गई.

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First published: March 5, 2020, 1:01 PM IST
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