अटल टनल निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार छेरिंग दोरजे की कोरोना से मौत

लाहौल स्पीति के छेरिंग दोरजे 85 साल के थे. (File Photo)
लाहौल स्पीति के छेरिंग दोरजे 85 साल के थे. (File Photo)

Lahual Spiti Chering Dorje Death: छेरिंग दोरजे के परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं. छेरिंग दोरजे भोटी भाषा के विद्धान रहे हैं और हिमाचल सरकार से वह बतौर डीपीआरओ सेवानिवृत्त हुए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 3:02 PM IST
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कुल्लू/मंडी. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप बढ़ा है. कोरोना के चलते सूबे के प्रसिद्ध साहित्यकार 85 वर्षीय छेरिंग दोरजे का निधन हो गया है. छेरिंग दोरजे (Chhering Dorge) ने साहित्य के क्षेत्र में दुनियाभर में नाम कमाया था. वहीं, अटल टनल (Atal Tunnel) के निर्माण को लेकर अहम योगदान दिया था. उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार को कई चिट्ठियां लिखीं और केंद्र सरकार के पास दिल्ली भी गए.

दोरजे हिमाचल के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति (Lahual Spiti) को एक अलग पहचान दिलाई थी. अटल टनल के उद्घाटन के दौरान टनल से गुजरी पहली HRTC बस में सवार होने वाले लोगों में उनका नाम भी शामिल था, लेकिन वह कोरोना के खतरे के चलते बस यात्रा में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन अब कोरोना संक्रमण के कारण ही उनका निधन हो गया.

चपेट में दो दिन पहले आए थे
छेरिंग दोरजे का 10 नवंबर को कुल्लू अस्पताल में कोरोना टेस्ट करवाया गया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. बाद में वह भुंतर स्थित तेगूबेहड़ कोरोना केयर सेंटर में भर्ती हुए थे, लेकिन गुरुवार 12 नवंबर को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज नेरचौक रेफर किया गया था. यहां पर शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया है. उनके बड़े बेटे भी कोरोना संक्रमित थे. बेटे का भी नेरचौक में उपचार हुआ था और वह स्वस्थ हो गए थे.
डीपीआरओ के पद से हुए थे रिटायर


छेरिंग दोरजे के परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं. छेरिंग दोरजे भोटी भाषा के विद्धान रहे हैं और हिमाचल प्रदेश की सरकार से वह बतौर डीपीआरओ सेवानिवृत्त हुए थे. उन्हें हिमालय एनसाइक्लोपीडिया भी कहा जाता है. वह अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष और मार्गदर्शक भी थे. छेरिंग दोरजे ने भोटी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जापान, कोरिया, रूस सहित विभिन्न देशों की यात्रा की है. साल 1939 में गुस्कियार गांव में जन्मे छेरिंग दोरजे ने अटल रोहतांग टनल निर्माण में टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल के साथ अहम किरदार निभाया. अपने जीवन मे छेरिंग दोरजे ने हिमालय के करीब 200 दर्रों को पैदल पार किया था.
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