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हिमाचल: 3 बार असफल होने पर भी नहीं खोया ‘धीरज’, चौथे अटेम्प्ट में पास की UPSC परीक्षा

धीरज ठाकुर ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जनजातीय क्षेत्र किलाड़-पांगी से हुई है. बाद में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कुल्लू के मौहल डीएवी स्कूल से पूरी की.

धीरज ठाकुर ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जनजातीय क्षेत्र किलाड़-पांगी से हुई है. बाद में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कुल्लू के मौहल डीएवी स्कूल से पूरी की.

UPSC Results 2020: धीरज ने बताया कि उनके पिता पांगी में सुपरिटेंडेंट है और माता गृहिणी हैं. सिविल सर्विस में जाने के लिए माता-पिता और मामा से प्ररेणा मिली. लगातार पिछले 5 साल से तैयारी कर रहे थे.

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कुल्लू. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी के सुराल गांव के धीरज ठाकुर ने 3 बार असफल होने के बाद भी उम्मीद नहीं छोड़ी. परिवार और दोस्तों की मोटिवेशन से चौथी बार यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Results 2020) में 615 रैंक हासिल किया है. इससे धीरज ठाकुर के परिवार में खुशी का माहौल है. उन्‍होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को दिया है.

धीरज ठाकुर ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जनजातीय क्षेत्र किलाड़-पांगी से हुई है. बाद में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कुल्लू के मौहल डीएवी स्कूल से पूरी की. बाद में सिविल इंजीनियरिंग में एनआईटी हमीरपुर 2016 में पढ़ाई पूरी की. उन्‍होंने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए साल 2017 में दिल्ली से कोचिंग ली. यह चौथा प्रयास था. इससे पहले तीन बार असफल रहे थे.

परिवार में कौन-कौन है

धीरज ने बताया कि उनके पिता पांगी में सुपरिटेंडेंट है और माता गृहिणी हैं. सिविल सर्विस में जाने के लिए माता विना ठाकुर, पिता प्रेम ठाकुर और मामा से प्ररेणा मिली. लगातार पिछले 5 साल से तैयारी कर रहे थे. जब भी मौका मिलता तो पढ़ाई करते रहे है. उन्होंने कहा कि आप कितने घंटे पढ़ाई करते हैं, यह मैटर नहीं करता है. केवल अच्छे से पढ़ाई करनी चाहिए. वह दिन में 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे. मैंने कॉलेज के अंतिम वर्ष से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी. धीरज बताते हैं वह सोशल मीडिया से दूर रहे और सिर्फ टेलीग्राम से जानकारी जुटाकर पढ़ाई की है.
क्या कहती हैं माता

धीरज ठाकुर की माता वीना ठाकुर ने कहा कि धीरज बचपन से ही पढ़ाई का शौक था. परिवार की तरफ से भी पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया गया. परिवार ने पूरा विश्वास कर आगे बढ़ने की प्ररेणा दी. धीरज के मामा ने काफी सपोर्ट किया. उसे जब भी समय मिला तो पढ़ाई करता था और घूमता भी था. उन्होंने सभी अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा कि बच्चों को स्पोर्ट करें और उन पर ध्यान रखें.

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