धूमधाम से संपन्न हुआ देव महाकुम्भ का विश्व विख्यात अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा

अगले वर्ष पुन: आने का वादा कर अपने देवालयों की ओर लौटे देवी देवता.

अगले वर्ष पुन: आने का वादा कर अपने देवालयों की ओर लौटे देवी देवता.

अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर से आरम्भ हुई रथ यात्रा ढालपुर कैटल मैदान तक पहुंची. यहां पर रावण वध की रस्म निभाने के बाद भगवान रघुनाथ अपने स्थाई शिविर रघुनाथपुर के लिए रवाना हुए.

  • Share this:
कुल्लू. देव महाकुंम्भ (Dev Mahakumbh) के नाम से विश्व विख्यात अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा (International Kullu Dussehra) का समापन हो गया है. दशहरे के समापन के साथ ही इसमें शरीक हुए सैकड़ों देवी देवता (Deities) अपने हरयानों और कारकुनों संग अपने देवालयों के लिए रवाना हो गए हैं. आज सोमवार को जिले के सैकड़ों देवी देवता अगले वर्ष फिर मिलने का वादा कर वापस लौट गए हैं. पिछले सात दिनों से देवलोक में तब्दील हुआ कुल्लू का ऐतिहसिक ढालपुर मैदान देवी देवताओं के वापस लौटते ही सुनसान सा पड़ गया है.



अपने देवालयों को लौटने से पूर्व अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में शिरकत करने पहुंचे देवी देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज करई और अगले वर्ष फिर आने का वादा कर अपने देवालयों की ओर रवाना हुए.



देवी देवाताओं की पालकी को एक दूसरे से अलग होता देख भावुक हुए लोग.






पूरा माहौल भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर से आरम्भ हुई रथ यात्रा ढालपुर कैटल मैदान तक पहुंची. यहां पर रावण वध की रस्म निभाने के बाद भगवान रघुनाथ अपने स्थाई शिविर रघुनाथपुर के लिए रवाना हुए. इस दौरान पूरा माहौल भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा. वहीं अधिक जानकारी देते हुए भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि आज सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का समापन हो गया है और जिले भर के सभी देवी देवता अगले वर्ष फिर से आने का वादा कर अपने अपने देवालयों की ओर लौट गए हैं.



भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि जिले भर के सभी देवी देवता अगले वर्ष फिर से आने का वादा कर अपने अपने देवालयों की ओर लौट गए हैं.




उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ की ओर से दशहरे के छठे दिन ही अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में आए देवी देवताओं को भगवान रघुनाथ की ओर से पुष्प और अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण देकर विदा कर दिया गया है. दानवेंद्र सिंह ने कहा कि कुल्लू दशहरे के अंतिम दिन अहम भूमिका देवी हिडिम्बा, नग्गर की मां भगवती, श्रृगां ऋषि, बिजली महादेव आदि की रहती है.



Youtube Video




ये भी पढ़ें - इन्वेस्टर मीट के बाद हिमाचल मंत्रिमंडल में होगा फेरबदल: सीएम जयराम ठाकुर



ये भी पढ़ें - आचार संहिता उल्लंघन को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को सौंपा ज्ञापन
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज