Atal Rohtang Tunnel: सबसे पहले मोरोवियन मिशनरीज़ ने साल 1860 में की थी टनल की कल्पना

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में मनाली-लेह राजमार्ग पर अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बन कर तैयार हो गई है.
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में मनाली-लेह राजमार्ग पर अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बन कर तैयार हो गई है.

Atal Rohtang Tunnel: टनल का निर्माण एफकॉन कंपनी ने किया है और साथ ही बीआरओ ने भी निर्माण में अहम भूमिका निभाई है. इस सुरंग में डबल लेन सड़क होगी. समुद्र तल से दस हजार फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी वाहन योग्य सुरंग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 8:57 AM IST
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मनाली. हिमाचल प्रदेश के मनाली (Manali) स्थित अटल रोहतांग टनल (Atal Rohtang Tunnel) किसी सपने से कम नहीं है. शायद ही किसी ने सोचा होगा कि पहाड़ को काटकर एक ऐसी टनल (Tunnel) भी बनेगी, जो लाहौल घाटी (Lahaul Valley) के लिए जीवनदायिनी बनेगी. दरअसल, सर्दियों में छह माह तक लाहौल का इलाका बर्फबारी (Snowfall) के चलते देश और दुनिया से कट जाता था, लेकिन अब यह 12 महीने जुड़ा रहेगा. इस टनल के निर्माण का इतिहास काफी रोचक है.

दुनिया में सबसे ऊंचाई पर किसी में हाईवे पर बनी सबसे लंबी अटल टनल रोहतांग ने करीब 160 साल का लंबा सफर तय किया है. अंग्रेजी शासन के दौरान साल 1860 में सबसे पहले मोरोवियन मिशनरीज़ ने रोहतांग दर्रा के नीचे सुरंग बनाने की कल्पना की थी. आजादी के बाद 1953 में टनल को खारिज कर राहलाफाल से रोहतांग और कोकसर तक रोपवे बनाने की योजना भी बनी थी. लेकिन वह भी योजना ही रह गई.

आस्ट्रेलियाई कंपनी ने बनाया है डिजाइन
सुरंग का डिजाइन तैयार करने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी स्नोई माउंटेन इंजीनियरिंग ने अपनी वेबसाइट में दावा किया है कि रोहतांग दर्रे पर सुरंग बनाने का पहला विचार 1860 में मोरावियन मिशन ने रखा था. इस सुरंग का डिजाइन घोड़े की नाल की तरह है. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में भी रोहतांग दर्रे पर रोप-वे बनाने का प्रस्ताव आया था.
रोहतांग टनल.




इंदिरा के सपने को अटल ने किया पूरा
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में मनाली-लेह के बीच साल भर कनेक्टिविटी को सड़क निर्माण की परियोजना बनी. वाजपेयी सरकार में वर्ष 2002 में रोहतांग दर्रे पर सुरंग बनाने की परियोजना की घोषणा हुई. साल 2019 में वाजपेयी के नाम पर ही सुरंग का नाम अटल सुरंग रखा गया. पूर्वी पीर पंजाल की पर्वत शृंखला में बनी 9.02 किमी लंबी यह सुरंग लेह-मनाली राजमार्ग पर है. यह करीब 10.5 मीटर चौड़ी और 5.52 मीटर ऊंची है.

बीआरओ की देखरेख में बनी
टनल का निर्माण एफकॉन कंपनी ने किया है और साथ ही बीआरओ ने भी निर्माण में अहम भूमिका निभाई है. इस सुरंग में डबल लेन सड़क होगी. समुद्र तल से दस हजार फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी वाहन योग्य सुरंग है. यह देश की पहली ऐसी सुरंग है, जिसमें मुख्य सुरंग के भीतर ही बचाव सुरंग बनाई गई है.
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