VIDEO: अटल टनल रोहतांग से पहली बार गुजरा भारतीय सेना का काफिला

अटल टनल से गुजरता सेना का काफिला.
अटल टनल से गुजरता सेना का काफिला.

Atal Tunnel Rohtang: इससे पहले, सेना के जवानों और वाहनों को रोहतांग पास के जरिये लेह और बॉर्डर की ओर जाना पड़ता था. छह महीने यह मार्ग बर्फबारी के चलते रोहतांग से बंद रहता था. लेकिन अब वाहन मनाली के धुंधी से लाहौल के सिस्सू पहुंचे जाएंगे.

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मनाली. हिमाचल प्रदेश के मनाली (Manali) स्थित अटल टनल रोहतांग (Atal Tunnel Rohtang) का तीन अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया था. अब उससे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है. इसी बीच बुधवार को पहली बार सेना (India Army) का काफिला गुजरा टनल से गुजरा है.

काफिले में सेना के कई ट्रक और अन्य वाहन शामिल रहे. ट्रकों में सेना के जरूरी दैनिक उपयोग के सामान को सीमांत और दूसरे इलाकों में भेजा गया है. अटल टनल को एलएसी के इलाकों में सेना की मूवमेंट के लिहाज से काफी अहम है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि इस सुरंग से सेना को सामरिक रूप से मजबूती मिलेगी.

सेना के ट्रकों में सामान भेजा गया है.




पहले रोहतांग होकर जाना पड़ता था
इससे पहले, सेना के जवानों और वाहनों को रोहतांग पास के जरिये लेह और बॉर्डर की ओर जाना पड़ता था. छह महीने यह मार्ग बर्फबारी के चलते रोहतांग से बंद रहता था. लेकिन अब वाहन मनाली के धुंधी से लाहौल के सिस्सू पहुंचे जाएंगे.


सीएम ने भी दिया था बयान
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि अटल टनल रोहतांग सामरिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है, जिससे देश के सैन्य बलों को वर्ष भर सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए आवाजाही की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनाली-लेह-लद्दाख सड़क मार्ग सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम है और अटल सुरंग से सैन्य बलों को कम समय में आवाजाही के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सामाग्री की आपूर्ति करने की सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि इस सुरंग के निर्माण से सैन्य बलों के आवागमन और आपूर्ति में एक दिन के समय की बचत होगी.

अटल टनल से गुजरी गाड़ियों में रखा सामान.


अटल सरकार में हुई थी घोषणा

रोहतांग दर्रे के नीचे टनल बनी टनल को बनाने के लिए तीन जून 2000 को फैसला हुआ था. अटल सरकार में 26 मई 2002 को आधारशिला रखी गई थी. कुल 9.2 किलोमीटर लंबी यह सुरंग 10 हजार की फीट की ऊंचाई पर बनाई गई दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है. चीन से तनाव के बीच मनाली से लेह को जोड़ने वाली दुनिया की सबसे लंबी अटल टनल 10 सालों में बनकर तैयार हुई है और इस पर 3200 करोड़ खर्च हुआ है. साल 2010 में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इसके निर्माण का आगाज किया था.
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