रामस्वरूप शर्मा: क्या इस बार भी मोदी लगाएंगे ‘सुदामा’ की नैय्या पार?

राम स्वरूप शर्मा बताते हैं कि उस दौर में सरकारी नौकरी के प्रति इतनी भागमभाग नहीं होती थी. सरकारी नौकरी सही न लगे तो लोग कोई दूसरा विकल्प देखते थे.

News18 Himachal Pradesh
Updated: May 16, 2019, 11:57 AM IST
रामस्वरूप शर्मा: क्या इस बार भी मोदी लगाएंगे ‘सुदामा’ की नैय्या पार?
रामस्वरूप दूसरी बार मंडी से लोकसभा चुनाव के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
News18 Himachal Pradesh
Updated: May 16, 2019, 11:57 AM IST
क्या मोदी के सखा ‘सुदामा’ मंडी सीट से इस बार का लोकसभा चुनाव जीत पाएंगे. पिछली बार मोदी लहर में जीते भाजपा के मौजूदा सांसद रामस्वरूप शर्मा को पंडित सुखराम के पोते सामने आश्रय शर्मा टक्कर दे रहे हैं.

गौरतलब है कि रामस्वरूप को पीएम मोदी ने 2014 में मंडी में एक चुनावी जनसभा में सुदामा कहा था.रामस्वरूप शर्मा मंडी लोकसभा सीट से दूसरी बार मैदान में हैं. मंडी हिमाचल की ह़ॉट सीट में है. यह देश की दूसरा सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र है.



सरकारी नौकरी छोड़ी
राम स्वरूप शर्मा ने 1976 से 1984 तक एनएचपीसी में वेलफेयर सुपरवाइजर के पद पर सेवाएं दी. इसके बाद सरकारी नौकरी छोड़ दी और जोगिंद्रनगर में अपनी प्रिंटिंग प्रेस शुरू की. साल 1980 में स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़े और संघ के विभिन्न पदों का दायित्व निभाया. 1995 में भाजपा में शामिल हुए. तीन बार मंडी जिला के महामंत्री रहे. 2000 से 2004 तक प्रदेश भाजपा संगठन के महामंत्री रहे. 2004 से 2006 तक प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष रहे. इसके बाद हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के प्रभारी बने.

मोदी लहर में जीते
साल 2007 में भाजपा की सरकार के दौरान राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष रहे और प्रदेश भाजपा के महासचिव भी रहे. 2014 में राजनैतिक जीवन में सबसे बड़ा बदलाव आया. लोकसभा का टिकट मिला और रानी प्रतिभा सिंह को 36 हजार से अधिक मतों से परास्त करके लोकसभा पहुंचे. राम स्वरूप शर्मा बताते हैं कि यह उनके राजनैतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय था, जिसमें उन्होंने एक बड़ा परिवर्तन किया. मौजूदा समय में सांसद हैं और इस बार फिर से भाजपा के टिकट पर अपना भाग्य आजमाने मैदान में उतरे हैं. मंडी से मुख्यमंत्री बनना जिंदगी का दूसरा ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि आजादी के बाद से चली आ रही मंडी की मांग को जयराम ठाकुर के रूप में पूरा किया. राम स्वरूप शर्मा बताते हैं कि अधिक से अधिक समय जनता के साथ बीताना उन्हें अच्छा लगता है. लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुनना और यदि कोई समस्या हो तो उसका समाधान करने पर एक अलग से सुकुन की अनुभूति होती है.

इसलिए छोड़ी सरकारी नौकरी
Loading...

राम स्वरूप शर्मा बताते हैं कि उस दौर में सरकारी नौकरी के प्रति इतनी भागमभाग नहीं होती थी. सरकारी नौकरी सही न लगे तो लोग कोई दूसरा विकल्प देखते थे. ऐसा ही इन्होंने ने भी किया और अपनी प्रिंटिंग प्रेस खोली जो आज तक चल रही है. अभी इनका बेटा इसे संभालता है.
गौरतलब है कि रामस्वरूप ने दसवीं तक की पढ़ाई की है. 2014 के लोकसभा चुनाव में दिए शपथ पत्र और 2019 के शपथ पत्र के मुताबिक, पांच साल में उनकी संपत्ति करीब बीस लाख रुपये बढ़ी है. उनके अलावा उनकी धर्मपत्‍नी की संपत्ति में भी करीब 17 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है. 2014 में सांसद के पास 2,05,555 रुपये चल संपत्ति थी.

कुल संपत्ति में बढ़ोतरी
पांच साल बाद वर्ष 2019 में यह संपत्ति करीब 28,33,538 रुपये की हो गई है. चल संपत्ति में ही 26,27,983 रुपये बढ़ोतरी हुई है. अचल संपत्ति पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान 50 लाख थी, अब वह 62 लाख के करीब हो चुकी है. इसमें 12 लाख की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, उनकी कुल संपत्ति में 38 लाख बढ़ोतरी हुई है. उनकी पत्नी के पास 2014 में 19,73,316 रुपये की चल संपत्ति थी, अब वह 28,90,799 हो गई है. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी अचल संपत्ति 30 लाख थी. वर्तमान अचल संपत्ति 38 लाख हो गई है. अचल संपत्ति में आठ लाख, जबकि चल संपत्ति में 9.17 लाख बढ़ोतरी हुई है. कुल चल व अचल संपत्ति में 17.17 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

ये भी पढ़ें: हिमाचल में BJP की रैली में जा रही निजी बस पलटी, 7 घायल

लोकसभा चुनाव 2019: आज कुल्लू में रैली करेंगे राजनाथ सिंह

राजनेता नहीं, DU में प्रोफेसर बनना चाहते थे वीरभद्र सिंह

ममता दीदी की सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं: सीएम जयराम

डोडरा क्वार: 14 किमी पैदल चल यहां पहुंचेगी EC की पोलिंग टीम

PHOTOS: खज्जियार में भारी भूस्खलन, लापता चालक की तलाश जारी
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...