औट टनल के दोनों छोर मिले, समय से पहले पूरा हुआ बोरिंग का काम

पंडोह से औट तक फोरलेन के लिए बनाई जा रही दस टनलों में से सबसे लंबी टनल की बोरिंग का काम पूरा हो गया. आज टनल के दोनों छोर आपस में मिल गए.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 3, 2019, 6:02 PM IST
औट टनल के दोनों छोर मिले, समय से पहले पूरा हुआ बोरिंग का काम
मंडी - सबसे बड़ी 2.9 किमी की टनल के आज मिल गए दोनों छोर
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 3, 2019, 6:02 PM IST
पंडोह से औट तक फोरलेन के लिए बनाई जा रही दस टनलों में से सबसे लंबी टनल की बोरिंग का काम पूरा हो गया. आज टनल के दोनों छोर आपस में मिल गए. टनल का शुभारंभ एनएचएआई के रिजनल डायरेक्टर जीएस सांगा ने रिबन काटकर किया. बता दें कि इस टनल का कार्य निर्धारित समय से 5 महीने पहले पूरा किया गया है. मनाली जाने वाले पर्यटकों को भले ही अभी सही सड़क सुविधा नहीं मिल रही हो, लेकिन आने वाले समय में उन्हें निश्चित ही बेहतरीन सड़क सुविधाएं मिलने लगेगी. इसके लिए फोरलेन का कार्य दिन रात तेज गति के साथ चल रहा है. बता दें कि इस फोरलेन के लिए बनाई जा रही टनलों का काम पंडोह से औट तक का हिस्सा भूस्खलन से भरा है और यहां पर फोरलेन को टनलों से होकर गुजारा जाएगा. इसके लिए दस टनलों का निर्माण किया जा रहा है. एनएचएआई ने यह काम एफकॉन कंपनी को सौंप रखा है.

औट के पास 2.9 किमी की सबसे लंबी टनल बनाई जा रही है. इस टनल की बोरिंग का काम सितंबर 2018 में शुरू हुआ था और दोनों तरफ से रोजाना 11मी. की खुदाई के साथ निर्धारित समय से पहले ही इस कार्य को पूरा कर लिया गया. एनएचएआई के रिजनल डायरेक्टर जीएस सांगा ने आज इसका विधिवत रूप से शुभारंभ करते हुए कंपनी को बेहतरीन कार्य के लिए बधाई दी. उन्होंने बताया कि दिसंबर से पहले दो और टनलों की बोरिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि निर्धारित समय पर इस पूरे प्रोजेक्ट का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया जाएगा.

42 महीनों में कार्य पूरा करने का लक्ष्य

aut tunnel
पंडोह से औट तक फोरलेन के लिए हो रहा है दस टनलों का निर्माण.


एफकॉन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके सिंह ने बताया कि टनलों के निर्माण को पूरी गंभीरता से किया जा रहा है. इसमें एनएटीएम यानी न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मेथड का इस्तेमाल किया जा रहा है. बता दें कि रोहतांग टनल भी इसी तकनीक से बनी है. उन्होंने कहा कि 42 महीनों में सारे कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दिन रात काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि नई तकनीक वाली इन टनलों में हर प्रकार की सुविधा होगी और यहां से गुजरने वाले यात्रियों को एक नया अनुभव होगा.

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First published: August 3, 2019, 6:02 PM IST
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