310 रुपये की शराब की बोतल के वसूले 360 रुपये, सेल्समैन पर ठोका जुर्माना

खरीददार ने इस बारे में आबकारी एवं काराधान विभाग और उपायुक्त मंडी को इस बाबत शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत का निराकरण नहीं किया जा सका.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 9:35 AM IST
310 रुपये की शराब की बोतल के वसूले 360 रुपये, सेल्समैन पर ठोका जुर्माना
हिमाचल के मंडी में शराब के अधिक दाम वसूलने पर जुर्माना लगाया गया है.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 9:35 AM IST
महंगी शराब बेचना विक्रेता को भारी पड़ गया. मामला हिमाचल के मंडी जिले का है. राज्य उपभोक्ता आयोग ने उसके द्वारा अधिक वसूली 50 रूपये की राशि को खरीददार के पक्ष में ब्याज सहित लौटाने और दस हजार अदा करने का फैसला सुनाया है.

राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमुर्ति पीएस राणा और सदस्यों सुनीता वर्मा व विजय कुमार खाची ने हिमाचल प्रदेश उपभोक्ता संघ की अपील को स्वीकारते हुए विक्रेता सीपीएस त्यागी (एल-2 ठेकेदार) को खरीददार रूप उपाध्याय के पक्ष में अधिक वसूले गए 50 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित लौटाने का फैसला सुनाया.

ये है पूरा मामला
इसके अलावा, विक्रेता को खरीददार के पक्ष में मानसिक यंत्रणा पहुंचाने के बदले 5000 रुपये हर्जाना तथा 5000 रूपये शिकायत व्यय भी अदा करने का आदेश दिया. आयोग ने विक्रेता को एक माह के भीतर इस आदेश की अनुपालना करने के निर्देश दिए हैं. अधिवक्ता दिग्विजय सिंह और किर्ती सूद के माध्यम से आयोग में दायर अपील के अनुसार हि.प्र. उपभोक्ता संघ ने शिकायत दायर की थी कि रूप उपाध्याय 20 अप्रैल 2016 को विक्रेता की दूकान से शराब खरीदने के लिए गए थे. जहां पर उन्होने आईएमएफएल ग्रीन लेबल ब्रांड की वाइन खरीदनी चाही.

रसीद मांगी तो नहीं दी
शराब की बोतल पर अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) 310 रुपये अंकित था, लेकिन विक्रेता के सेल्समैन ने उनसे 360 रुपये की मांग की. इस पर खरीदार रूप उपाध्याय ने विरोध प्रकट करते हुए सेल्समैन से रसीद की मांग की. लेकिन सेल्समैन ने रसीद देने से बिल्कुल इंकार कर दिया.

लंबी जद्दोजहद के बाद फैसला
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हालांकि, खरीददार ने इस बारे में आबकारी एवं काराधान विभाग और उपायुक्त मंडी को इस बाबत शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत का निराकरण नहीं किया जा सका. इसके चलते हि.प्र. उपभोक्ता संघ ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई थी. लेकिन फोरम ने इस शिकायत के तथ्यों को दीवानी मामला मानते हुए इसे खारिज कर दिया था. इस पर उपभोक्ता संघ ने राज्य उपभोक्ता आयोग को अपील की थी.

ऐसे साबित किया मामला
आयोग ने अपील को स्वीकारते हुए कहा कि विवादित मामलों को दो तरीकों से साबित किया जा सकता है. पहला तरीका चश्मदीद गवाहों के ब्यान से और दूसरा तरीका दस्तावेजों के साक्ष्यों से है. इस मामले में चश्मदीद गवाह बीआर जसवाल ने खरीददार रूप उपाध्याय के शपथ पत्र को अपने शपथ पत्र से साबित किया है कि विक्रेता के सेल्समैन ने उनसे अधिक राशि वसूल की थी.

शपथ पत्र नहीं दिया 

विक्रेता की ओर से चश्मदीद गवाह सेल्जमैन का शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया था. इससे विक्रेता का पक्ष साबित नहीं हो सका. ऐसे में राज्य उपभोक्ता फोरम ने अपील को स्वीकारते हुए खरीददार से ज्यादा वसूली गई राशि को ब्याज सहित लौटाने और विक्रेता की सेवाओं में कमी के कारण खरीददार को हुई परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है.

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First published: July 29, 2019, 9:32 AM IST
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