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Mandi By-elections: मंडी में कांग्रेस की जीत के साथ ही 70 साल का ‘मिथक’ भी टूटा

Mandi By-elections: मंडी में कांग्रेस की जीत के साथ ही 70 साल का ‘मिथक’ भी टूटा

शिमला में जीत के बाद अपने निवास पर प्रतिभा सिंह.

शिमला में जीत के बाद अपने निवास पर प्रतिभा सिंह.

Mandi By polls Results: मंडी लोकसभा सीट से प्रतिभा सिंह तीसरी बार चुनाव जीती हैं. वह पांचवीं बार मंडी के दंगल में उतरी थी और दो बार उन्हें हार भी नसीब हुई है. इससे पहले, वह 2004 और 2013 में यहां से सांसद रही हैं. मंडी में बीते दो लोकसभा चुनाव से भाजपा का कब्जा रहा था, लेकिन अब यह सीट कांग्रेस के पास आ गई है.

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    मंडी. हिमाचल प्रदेश (Congress) के मंडी लोकसभा उपचुनाव (Mandi By-elections) में हार से भाजपा को करारा झटका लगा है. क्योंकि दो टर्म से यह सीट भाजपा (BJP) के पास थी और केंद्र में भी भाजपा (BJP) की ही सरकार है. लेकिन कांग्रेस की जीत के साथ ही यहां से 70 साल का मिथक टूट गया. दरअसल, अब तक केंद्र में जिसकी सरकारें रहती हैं, मंडी से भी उसी पार्टी का सांसद यहां से होता है. लेकिन अब केंद्र में मोदी सरकार है, जबकि प्रतिभा सिंह (Pratibha Singh) कांग्रेस की सांसद हैं.

    जानकारी के अनुसार, मंडी लोकसभा सीट पर 1952 में दो सांसद चुने जाते थे और मंडी सीट को महासू कहते थे. उस समय यहां से गोपी राम और रानी अमृतमौर सांसद बनी थीं. बाद में 1957 में मंडी के राजा जोगिंदर सेन, 1962 व 1967 में सुकेत के राजा ललित सेन, 1971 में वीरभद्र सिंह चुनाव जीते. इन सब के कार्यकाल में केंद्र में कांग्रेस की सरकारें बनीं. वहीं, साल 1977 में ठाकुर गंगा सिंह जनता पार्टी के टिकट पर जीते और केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी. तब भी केंद्र और मंडी में जनता पार्टी का परचम लहराया था.

    साल 1980 में वीरभद्र सिंह जीते और केंद्र में कांग्रेस सता में आई. साल 1984 में जब पंडित सुख राम की जीत हुई. वह इंदिरा गांधी और्र राजीव गांधी की सरकार में शामिल हुए. 1989 में जब यहां से भाजपा के महेश्वर सिंह जीते तो केंद्र में भाजपा के समर्थन से वीपी सिंह की सरकार बनी. 1991 में पंडित सुखराम जीते व संचार मंत्री बने. 1996 में फिर से पंडित सुखराम जीते व केंद्र में कांग्रेस के समर्थन से देवगौड़ा की सरकार बनी.

    1996 में जब पंडित सुखराम जीते थे तो उस समय अटल विहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी, मगर वह महज 13 ही दिन चली और फिर से कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार बन गई थी. 1998 और 1999 में भाजपा के महेश्वर सिंह सांसद बने, जबकि केंद्र में भाजपा नीत अटल विहारी वाजपेयी की सरकार बनी.

    अगले दस साल तक कांग्रेस का साथ

    साल 2004 में कांग्रेस के टिकट पर प्रतिभा सिंह ने जीत हासिल की, जबकि 2009 में वीरभद्र सिंह सांसद चुने गए. इस दौरान दस साल तक कांग्रेस ने केंद्र में राज किया. वीरभद्र सिंह मंत्री भी रहे. हालांकि, बाद में 2013 में हुए उपचुनाव में प्रतिभा सिंह चुनी गईं, तब भी केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. 2014 और 2019 में भाजपा ने केंद्र में लगातार सरकार बनाई तो मंडी से रामस्वरूप शर्मा सांसद चुने गए. बाद में उनके निधन से सीट खाली हुई तो अब उपचुनाव में 70 साल से चली आ रही परंपरा टूट गई है और भाजपा को तगड़ा झटका लगा है.

    कितने वोटों से जीती प्रतिभा सिंह

    बता दें कि प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं. पहला चुनाव इसी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था, जब भाजपा के महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख मतों से पराजित किया था. 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी. और महेश्वर सिंह से 1998 की हार का बदला लिया. 2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था और 2013 में उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरीं. वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करीब 1.39 लाख मतों से शिकस्त दी थी. साल 2014 में लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया. इस बार करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरीं और जीत दर्ज की. हालांकि, जीत का मार्जन केवल 7400 के करीब रहा है.

    Tags: Himachal election, Himachal pradesh, Mandi City, Shimla News

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