हिमाचल: एक और शराब विक्रेता पर जुर्माना, बोतल पर वसूले थे 30 रुपये ज्यादा

बता दें कि कुछ दिन पहले भी ऐसे ही मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ठेकेदार को अधिक वसूली करने पर जुर्माना लगाया था.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 7, 2019, 10:16 AM IST
हिमाचल: एक और शराब विक्रेता पर जुर्माना, बोतल पर वसूले थे 30 रुपये ज्यादा
शराब विक्रेता पर लगा जुर्माना.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 7, 2019, 10:16 AM IST
शराब की ज्यादा कीमत वसूलना विक्रेता को महंगा साबित हुआ. राज्य उपभोक्ता आयोग ने अधिक वसूले 30 रुपये खरीदार के पक्ष में ब्याज सहित लौटाने और दस हजार रुपये अदा करने का फैसला सुनाया. मामला हिमाचल के मंडी जिले है.

राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीएस राणा और सदस्यों सुनीता वर्मा व विजय कुमार खाची ने हिमाचल प्रदेश उपभोक्ता संघ की अपील को स्वीकारते हुए विक्रेता सीपीएस त्यागी (एल-2 ठेकेदार) को खरीददार वेद कुमार के पक्ष में अधिक वसूले गए 30 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित लौटाने का फैसला सुनाया.

शिकायत व्यय भी अदा करने का आदेश
विक्रेता को खरीददार के पक्ष में 5000 रूपये हर्जाना तथा 5000 रूपये शिकायत व्यय भी अदा करने का आदेश दिया. आयोग ने विक्रेता को एक माह के भीतर इस आदेश की अनुपालना करने के निर्देश दिए हैं. अधिवक्ता दिग्विजय सिंह और कीर्ति सूद के माध्यम से आयोग के अनुसार, हि.प्र. उपभोक्ता संघ ने फोरम में शिकायत दायर की थी कि साल 2016-17 में वेद कुमार और जितेन्द्र भारद्वाज विक्रेता की दुकान से शराब खरीदने के लिए गए थे. जहां पर उन्होंने आईएमएफएल आफिसर च्वाइस ब्रांड की शराब खरीदनी चाही. शराब की बोतल पर अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) 300 रुपये अंकित था, लेकिन विक्रेता के सेल्समैन ने उनसे 330 रुपये वसूले.

रसीद मांगी नहीं दी
इस पर खरीददार वेद कुमार ने विरोध प्रकट करते हुए सेल्समैन से रसीद की मांग की, लेकिन सेल्समैन ने रसीद देने से बिल्कुल इंकार कर दिया. हालांकि, खरीददार ने इस बारे में आबकारी एवं काराधान विभाग और उपायुक्त मंडी को इस बाबत शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत का निराकरण नहीं किया जा सका. इसके चलते हि.प्र. उपभोक्ता संघ ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई थी. लेकिन फोरम ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था. हिप्र उपभोक्ता संघ के सचिव लवण ठाकुर ने फोरम के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपील दायर की थी.

इस तरह साबित हुआ मामला
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आयोग ने अपील को स्वीकारते हुए कहा कि विवादित मामलों को दो तरीकों से साबित किया जा सकता है. पहला तरीका चश्मदीद गवाहों के ब्यान से और दूसरा तरीका दस्तावेजों के साक्ष्यों से है. इस मामले में चश्मदीद गवाह जितेन्द्र कश्यप ने खरीददार वेद कुमार के शपथ पत्र को अपने शपथ पत्र से साबित किया है कि विक्रेता के सेल्समैन ने उनसे अधिक राशि वसूल की थी. विक्रेता की ओर से चश्मदीद गवाह सेल्ममैन का शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया था.

पहले भी हुआ था ऐसा मामला
इससे विक्रेता का पक्ष साबित नहीं हो सका. ऐसे में राज्य उपभोक्ता फोरम ने अपील को स्वीकारते हुए खरीददार से ज्यादा वसूली गई राशि को ब्याज सहित लौटाने और विक्रेता की सेवाओं में कमी के कारण खरीददार को हुई परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है. बता दें कि कुछ दिन पहले भी ऐसे ही मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ठेकेदार को अधिक वसूली करने पर जुर्माना लगाया था.

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First published: August 7, 2019, 10:11 AM IST
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