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चीड़ पत्तियों पर आधारित उद्योग लगाने में सरकार 50% सब्सिडी और कच्चा माल फ्री देगी

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 30, 2019, 7:08 PM IST
चीड़ पत्तियों पर आधारित उद्योग लगाने में सरकार 50% सब्सिडी और कच्चा माल फ्री देगी
चीड़ की पत्तियों पर आधारित उद्योग के लिए अधिकतम 25 लाख तक सब्सिडी वन विभाग देगी.

चीड़ की पत्तियों (Leaf Of Pine) पर आधारित उद्योग को स्थापित करने के लिए वन विभाग की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी (Subsidy) दी जा रही है.

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मंडी. हिमाचल में जंगलों को आग से बचाने के लिए चीड़ की पत्तियों (Leaf of Pine) पर आधारित उद्योगों को स्थापित करने की मुहिम प्रदेश (Himachal Pradesh) सरकार ने छेड़ रखी है. हालांकि उद्यमियों में चीड़ के पत्तों से जुड़े उद्योग (Industry) को लेकर कई तरह की शंकाएं हैं जिसके चलते यह मुहिम धरातल पर सही ढंग से नहीं उतर पा रही है. उद्यमियों की शंकाओं को दूर करने के लिए आज वन विभाग की तरफ से मंडी में जोनल स्तर की कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता पीसीसीएफ (हाॅफ) अजय शर्मा ने की जबकि उनके साथ वन व उद्योग विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे. उन्होंने उद्यमियों की शंकाएं दूर की और चीड़ उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित किया.

वन विभाग के पास अब तक आए 27 आवेदन

वन विभाग के पीसीसीएफ (हॉफ) अजय शर्मा ने बताया कि आईआईटी मंडी नेे चीड़ की पत्तियों के ब्रिकेटस बनाने के लिए एक मशीन बनाई है जिसे पंजाब की कंपनियां साढ़े पांच लाख रूपए में बेच रही हैं. इस मशीन के जरिए चीड़ की पत्तियों के ब्रिकेटस बनाए जाते हैं, जिन्हें ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने बताया कि इस उद्योग को स्थापित करने के लिए वन विभाग की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जोकि अधिकतम 25 लाख तक हो सकती है.

हिमाचल में अभी तक कुल 27 आवेदन विभाग के पास पहुंचे हैं जिन्हें अप्रूवल दी जा चुकी है. अब इन आवेदन को उद्योग विभाग की सिंगल विंडो क्लीयरेंस जरूरी है. इन उद्यमियों को वर्कशॉप के जरिए विस्तार से बताया गया कि उन्हें कच्चा माल कैसे मिलेगा, उत्पादित माल कैसे बिकेगा और कैसे उद्योग लगाया जाएगा.

बिक्रेटस की मार्केटिंग में सरकार करेगी मदद

अजय शर्मा ने बताया कि उद्योग लगाने वाले को वन विभाग एक साल तक चीड़ की पत्तियां नि:शुल्क मुहैया करवाएगा और ब्रिकेटस की मार्केंटिंग के लिए सरकार पूरी मदद करेगी. उन्होंने उद्यमियों को स्पष्ट किया कि पर्यावरण विभाग की ओर अधिसूचना जारी कर दी गई है कि सीमेंट व अन्य प्रकार के उद्योगों को 0.1 प्रतिशत फॉरेस्ट बेस्ड रॉ मटीरियल ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना ही होगा.

मंडी डिवीजन में एक फर्म में उत्पादन शुरू
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वहीं, मंडी डिविजन में स्थापित एक फर्म ने उत्पादन शुरू कर दिया है. फर्म का उत्पादित माल लेह की एक फर्म ने खरीद भी लिया है. 20 क्विंटल माल दस रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा गया है, जबकि फर्म की ओर से और अधिक माल की मांग की गई है. उद्यमी प्रेम सिंह ने बताया कि रोजाना तीन से चार क्विंटल माल उत्पादित किया जा सकता है. यह मशीन करीब एक घंटे में करीब 60 से 70 किलो ब्रिकेटस तैयार करती है.

वर्कशॉप में ये रहे मौजूद

पालमपुर डिवीजन में चीड़ पत्तियों पर आधारित उद्योग स्थापित करने जा रहे उद्यमी सचिन गुप्ता का कहना है कि उन्हें इस बारे कई शंकाएं थी जिन्हें वर्कशॉप में आए अधिकारियों ने दूर कर दिया. उन्होंने बताया कि वन विभाग इस तरह का उद्योग स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है. उद्यमियों को विभाग की ओर से हर प्रकार की सहायता मिल रही है. वर्कशॉप में मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा से आए 12 उद्यमी मौजूद रहे. इस दौरान सीसीएफ मंडी उपासना पटियाल, डीएफओ मंडी एसएस कश्यप और डीएसपी हैडक्वार्टर मुंशी राम सहित वन और उद्योग विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे.

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First published: October 30, 2019, 7:08 PM IST
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