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हिमाचल की IIT मंडी ने इजाद की तकनीक, अब फोटो से पता चल जाएगी आलू की बीमारी

 आलू की बीमारी पर शोध. Image/shutterstock

आलू की बीमारी पर शोध. Image/shutterstock

IIT Mandi New Technique: शोध में डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन और डॉ. श्याम के. मसकपल्ली के साथ शोध विद्वान - आईआईटी मंडी के जो. जॉनसन और सुश्री. गीतांजलि शर्मा और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के डॉ. विजय कुमार दुआ, डॉ. संजीव शर्मा और डॉ जगदेव शर्मा ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है.

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मंडी. हिमाचल प्रदेश की आईआईटी मंडी (IIT Mandi) के शोधकर्ताओं ने आलू की खेती करने वालों के लिए एक आधुनिक तरीका इजाद किया है, जो फसल को बीमारी से बचाने के लिए मददगार साबित होगा. शोधकर्ताओं ने जटिल कम्प्युटेशनल मॉडल से एक कम्प्युटर एप्लीकेशन का निर्माण किया है, जो आलू के पत्तों की तस्वीरों (Photos) से ब्लाइट यानी झुलसा रोग का पता लगाएगा.  आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कम्प्युटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के ऐसोसिएट प्रोफेसर डा. श्रीकांत श्रीनिवासन के मार्गदर्शन में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के सहयोग से जारी शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से पत्तों के रोग ग्रस्त हिस्सों का पता लगाने में सफलता हासिल की है.

फसल हो जाती है तबाह

अमूमन आलू को ब्लाइट रोग लगता है और यदि समय पर इसकी रोकथाम न की जाए तो यह एक सप्ताह के भीतर पूरी फसल तबाह कर देता है. इसकी जांच पड़ताल करने के लिए विशेषज्ञों को खेतों में जाना पड़ता है और गहनता से इसकी जांच करनी पड़ती है, जिसके बाद ही रोग का पता लगता है. लेकिन अब कम्प्युटर और मोबाइल एप्लीकेशन से मात्र पत्तों की तस्वीर अपलोड करने से ही यह पता चल जाएगा कि फसल को रोग लगा है या नहीं. यदि लगा है तो समय पर इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से पत्तों के रोग ग्रस्त हिस्सों का पता लगाने में सफलता हासिल की है.


कैसे परिणाम आए

डा. श्रीकांत श्रीनिवासन ने बताया कि अभी तक इसके 98 प्रतिशत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. इस सारे शोध का खर्च भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया है. हाल में इसके परिणामों का प्रकाशन प्लांट फीनोमिक्स नामक जर्नल में किया गया है. यह मॉडल पूरे देश में पोर्टेबल हो इसपर विशेष ध्यान दिया गया है. इस मॉडल की सफलता के बाद आईआईटी मंडी की टीम इसको छोटा कर लगभग दस मेगाबाइट का बना रही है, ताकि इसे स्मार्टफोन पर बतौर एप्लीकेशन उपलब्ध कराया जा सके. इसपर अधिकतर कार्य पूरा हो चुका है. इस तरह किसान के रोगग्रस्त दिखते पत्तों की तस्वीर लेने पर यह एप्लीकेशन रीयल टाइम इसकी पुष्टि कर देगा कि पत्ता रोगग्रस्त है या नहीं? किसान को समय से पता चल जाएगा कि खेत में रोग की रोकथाम के लिए छिड़काव कब करना है ताकि उपज खराब नहीं हो और फंगसनाशक की फिजूलखर्ची भी नहीं हो. इस शोध में डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन और डॉ. श्याम के. मसकपल्ली के साथ शोध विद्वान - आईआईटी मंडी के जो. जॉनसन और सुश्री. गीतांजलि शर्मा और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के डॉ. विजय कुमार दुआ, डॉ. संजीव शर्मा और डॉ जगदेव शर्मा ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है.

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