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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर मंडी शहर को सुरक्षा कवच दे गए देव आदि ब्रह्मा
Mandi News in Hindi

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 28, 2020, 2:22 PM IST
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर मंडी शहर को सुरक्षा कवच दे गए देव आदि ब्रह्मा
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले देव आदि ब्रह्मा के रथ को पूरे शहर में घुमाया गया.

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव (International Shivaratri Festival) में शामिल होने के लिए आने वाले देवी-देवताओं (Deities) का अपना-अपना इतिहास है और मान्यताएं हैं. इन्हीं में से एक देवता ऐसे भी हैं जो हर वर्ष शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर मंडी (Mandi) शहर को सुरक्षा कवच देकर जाते हैं. यह हैं देव आदि ब्रह्मा.

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मंडी. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव (International Shivaratri Festival) में शामिल होने के लिए आने वाले देवी-देवताओं (Deities) का अपना-अपना इतिहास है और मान्यताएं हैं. इन्हीं में से एक देवता ऐसे भी हैं जो हर वर्ष शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर मंडी शहर को सुरक्षा कवच देकर जाते हैं. यह हैं देव आदि ब्रह्मा. देव आदि ब्रह्मा का मूल स्थान मंडी (Mandi) जिला के इलाका उत्तरशाल के टिहरी गांव में है. सर्व देवता समिति एवं कारदार संघ के प्रधान शिवपाल शर्मा बताते हैं कि वर्षों पूर्व जब राजाओं के राज थे तो उस वक्त मंडी शहर पर बुरी आत्माओं का प्रभाव बढ़ने लगा था. लोगों को कई प्रकार की बीमारियां घेरने लगी थी. ऐसे में राजा ने अपनी रियासत के सभी देवी-देवताओं से इसका उपाय करने की गुहार लगाई. अधिकतर ने इनकार कर दिया, लेकिन देव आदि ब्रह्मा ने इस कार्य को करने की हामी भरी. देव आदि ब्रह्मा ने उस वक्त पूरे मंडी शहर की परिक्रमा की और शहर को बुरी शक्तियों तथा बीमारियों से मुक्ति दिलाई. तब से लेकर आज तक यह परंपरा इसी प्रकार से निभाई जाती है.

देव आदि ब्रह्मा के पुजारी ने भी तलवारों से बुरी शक्तियों को भगाने का प्रयास किया.


देव आदि ब्रह्मा के रथ को पूरे शहर में घुमाया गया

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले देव आदि ब्रह्मा के रथ को पूरे शहर में घुमाया जाता है. जब देवता का रथ परिक्रमा के लिए निकलता है तो अभिमंत्रित किया हुआ आटा हवा में फेंका जाता है. मान्यता है कि इससे बुरी शक्तियों का नाश होता है. वहीं देवता के गुर (पुजारी) ने भी तलवारों से



बुरी शक्तियों को भगाने का प्रयास किया.

जब देव आदि ब्रह्मा का रथ परिक्रमा के लिए निकलता है तो अभिमंत्रित किया हुआ आटा हवा में फेंका जाता है. मान्यता है कि इससे बुरी शक्तियों का नाश होता है.


सभी देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना हुए

शिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन चौहाटा बाजार में जात्र (देव समागम) का आयोजन किया गया. सुबह ही सभी देवी-देवताओं के रथों को चौहाटा बाजार में रखा गया जहां लाखों की संख्या में आए लोगों ने इनके दर्शन करके आशीवार्द प्राप्त किए. दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर विशेष प्रकार की अनुभूति का अहसास हुआ है और उन्होंने सभी के लिए मंगलकामना की है. चौहाटा बाजार की जात्र के बाद सभी देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना हो गए. अब ये सभी देवी-देवता एक वर्ष बाद अगले शिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने मंडी आएंगे और मंडी शहर की फिजाएं एक बार फिर देवी-देवताओं के आशीर्वाद से लबरेज होंगी.

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First published: February 28, 2020, 2:22 PM IST
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