सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन से जयराम सरकार के सामने चुनावी अग्निपरीक्षा की चुनौती

सांसद के निधन से संकट में जयराम सरकार और सुखराम परिवार.

सांसद के निधन से संकट में जयराम सरकार और सुखराम परिवार.

सांसद के निधन के बाद मंडी संसदीय क्षेत्र में अब फिर से उपचुनाव होगा. यह उपचुनाव राज्य की जयराम सरकार और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पंडित सुखराम परिवार की असली अग्निपरीक्षा करवाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 4:19 PM IST
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मंडी. सांसद राम स्वरूप शर्मा के निधन के चाहे जो भी कारण रहे हों, लेकिन उनके दुनिया से चले जाने के बाद अब जयराम सरकार और सुखराम परिवार पर संकट के बादल मंडराने लग गए हैं. मोदी के सुदामा जाते-जाते दोनों के सामने एक चुनावी अग्निपरीक्षा की चुनौती को छोड़ गए हैं. सांसद के निधन के बाद मंडी संसदीय क्षेत्र में अब फिर से उपचुनाव होगा. यह उपचुनाव राज्य की जयराम सरकार और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पंडित सुखराम परिवार की असली अग्निपरीक्षा करवाएगा. हालांकि अभी यह भविष्य में ही तय होगा कि भाजपा या कांग्रेस की तरफ से कौन प्रत्याशी चुनावी मैदान में होंगे, लेकिन 2019 में संपन्न हुए चुनावों के आधार पर आंकलन किया जाए तो जयराम सरकार और पंडित सुखराम परिवार के बीच ही घमासान देखने को मिला था.

जयराम के नाम पर ही लड़ा जाएगा उपचुनाव

अमूमन उपचुनावों में केंद्र के बड़े नेता नहीं आते. यह दायित्व उस राज्य के मुख्य चेहरों पर ही छोड़ा जाता है. राज्य की भाजपा सरकार की बात करें तो यहां जयराम ठाकुर की इस समय मुखिया हैं. ऐसे में फतेहपुर और मंडी का उपचुनाव जयराम ठाकुर के दम पर ही लड़ा जाएगा. विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होने जा रहे यह दो उपचुनाव जयराम सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे. मंडी संसदीय क्षेत्र जयराम ठाकुर का गृह संसदीय क्षेत्र भी है और ऐसे में यहां जयराम ठाकुर की असली अग्निपरीक्षा होने वाली है. एक तरफ उनकी सरकार बामुश्किल कोरोना काल से उभर कर जनता के बीच जाकर विकास के मुद्दों की दिशा में आगे बढ़ रही थी, ऐसे में दो उपचुनावों के साथ उसे अब फिर से जनता के बीच जाकर वोटों की गुहार करनी होगी.

पहले हारे, अब किसके सहारे
बात अगर राजनीति के चाणक्य पंडित सुखराम परिवार की करें तो आश्रय शर्मा पिछले चुनावों में कांग्रेस के युवा चेहरे के रूप में मैदान में थे. 4 लाख 5 हजार मतों के अंतर से मिली हार के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि फिर से मैदान में उतरने की तैयारी करनी पड़ेगी. इस बार भी सीधा मुकाबला सत्ता से है, तो मेहनत कुछ ज्यादा करने की जरूरत रहेगी. मई और जून की तपती गर्मी में खूब पसीना बहाना पड़ेगा. वहीं दूसरी तरफ आश्रय शर्मा को पिता अनिल शर्मा का फिर से साथ नहीं मिल पाएगा, क्योंकि वो अभी भी भाजपा के विधायक हैं. अनिल शर्मा भी फिर से इन उपचुनावों में पर्दे के पीछे से ही अपनी भूमिका निभाएंगे.

टिकट के लिए कई नाम सामने

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होने जा रहे मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव के लिए टिकट के कई चाहवान सामने आ रहे हैं. भाजपा की बात करें तो ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर, अजय राणा और महेश्वर सिंह चाहवानों में सबसे आगे हैं. हालांकि चर्चा गोबिंद ठाकुर के नाम की भी चल रही है लेकिन वह मंत्रीपद छोडक़र सांसद की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहेंगे. यह बात अलग है कि पार्टी आदेश करे और मजबूरी के कारण मैदान में उतरना पड़ जाए. कांग्रेस में आश्रय शर्मा के अलावा विक्रमादित्य सिंह, प्रतिभा सिंह और कौल सिंह ठाकुर के नामों की चर्चा जोरों पर है. आश्रय शर्मा को छोडक़र कांग्रेस की तरफ से जो भी चेहरा मैदान में होगा तो उसका कद बढऩा तय है. ऐसे में शायद सुखराम परिवार यह कतई नहीं चाहेगा कि टिकट उनके परिवार से बाहर चला जाए.

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