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बिना हाथों के NEET परीक्षा पास की, लेकिन नहीं मिली एडमिशन, अब HC में उठेगा मामला

रजत मंडी जिले से है.

रजत मंडी जिले से है.

रजत के पिता जयराम ने बताया कि उनके बेटे को एमबीबीएस की सीट मिली थी. उसे डॉक्टरी पढ़ने का मौका मिलना चाहिए, उन्होंने कहा कि बेटा शारीरिक तौर पर बेशक अक्षम है, मगर वह हाथों से नहीं तो कम से कम, मुंह से ओपीडी के काम कर सकता है.

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सुंदरनगर. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मंडी (Mandi) जिले के दिव्यांग युवक ने मुंह से पेन पकड़कर नीट (NEET) की परीक्षा दी और मेडिकल कॉलेज (Medical College) में उसे सीट भी मिल गई, लेकिन मेडिकल कॉलेज के बोर्ड ने उसकी एडमिशन रिजेक्ट कर दी. बोर्ड ने तर्क दिया कि वह ना दवाई लिख पाएगा, ना डॉक्टरी औजार चला पाएगा. ऐसे में उसे दाखिला नहीं मिल सकता है. लेकिन अब जल्द ही यह मामला हाईकोर्ट में उठेगा.

प्रदेश के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और मौजूदा कानूनी सलाहकार बीआर कौडल ने मीडिया में खबर लगने के बाद रजत के बारे में पूरी जानकारी लेना शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि रजत के साथ अगर अन्याय हुआ होगा, तो हाई कोर्ट से निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस बारे में जो कानूनी पक्ष होगा, उस पर गंभीरता से गौर किया जाएगा.

कौंडल ने किए ये सवाल
कौंडल ने कहा कि जो बच्चा मंहु से लिख कर नीट जैसी परीक्षा पास कर सकता है, क्या वह मुँह से दवाई नहीं लिख सकता? अगर मेडिकल बोर्ड रजत को डॉक्टर बनने का मौका देता तो पूरे देश में एक मिशाल होती कि हिमाचल में दिव्यांगता को हराकर ऐसा मेधावी डॉक्टर बना. उन्होंने कहा कि एक तरफ दिव्यांगों को सरकारें स्वालम्बी बनाने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ दिव्यांगों को इस तरह से दरकिनार किया जा रहा है.
परिवार के साथ रजत.
परिवार के साथ रजत.




यह है मामला
मंडी जिला के सुंदरनगर (Sunder Nagar) उपमंडल की डूगराई पंचायत के रड़ू गांव के रजत की करंट लगने के बाद दोनों बाजू कट गई. दोनों हाथ न होने के बावजूद उसने मुंह से लिखना शुरू किया. इस दौरान बाहरवीं की पढ़ाई की और अब नीट का एग्जाम पास कर मेडिकल कॉलेज नेरचौक में सीट हासिल की थी, लेकिन बोर्ड ने उन्हें दाखिला देने से इंकार कर दिया.

परिवार ने जताई खुशी
बीआर कोंडल द्वारा इस मामले को हाई कोर्ट के सामने रखने पर रजत के परिवार ने ख़ुशी जताई है. वहीं, कौंडल ने कहा कि बिजली की तारों से करंट लगने के 12 वर्ष बाद भी रजत को सरकार और बिजली बोर्ड की तरफ से कोई मुआबजा नहीं मिल पाया है, जिस के लिए भी वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.

यह बोले रजत के पिता
रजत के पिता जयराम ने बताया कि उनके बेटे को एमबीबीएस की सीट मिली थी. उसे डॉक्टरी पढ़ने का मौका मिलना चाहिए, उन्होंने कहा कि बेटा शारीरिक तौर पर बेशक अक्षम है, मगर वह हाथों से नहीं तो कम से कम, मुंह से ओपीडी के काम कर सकता है.

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