कोरोना ने नौकरी छीनी तो कड़कनाथ ने चलाई हिमाचली दंपति की जिंदगी की गाड़ी, घर में पाले जंगली मुर्गे

भारत में इन दिनों कड़कनाथ मुर्गा चर्चा में है. भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने रांची के पास कड़कनाथ मुर्गों के पालन का पॉल्ट्री फार्म बनाया है. कड़कनाथ को भारत में सबसे स्पेशल मुर्गों की प्रजाति में माना जा रहा है. विदेशों में भी इसकी खासी मांग है.

Kadaknath Farming in Mandi:हिमाचल के मंडी के मंजीत दिल्ली में नौकरी करते थे. कोरोना काल में नौकरी चली गई तो पिता और पत्नी पूजा के साथ मध्यप्रदेश से कड़कनाथ मुर्गी के नस्ल लाकर घर में पालन शुरू किया. पूजा ने भी विदेशी परिंदों का कारोबार शुरू किया है.

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मंडी. भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेन्द्र सिंह धोनी के झाबुआ के जंगली मुर्गों की प्रसिद्ध नस्ल कड़कनाथ का पालन करने के काम ने युवाओं को निश्चित ही रोजगार (Employment) की नई राह दिखाई है. ऐसे ही एक युवा हैं हिमाचल प्रदेश के मंडी (Mandi) जिला के नाचन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नलसर में सरकाघाट के मंजीत शर्मा. मंजीत शर्मा दिल्ली में नौकरी करते थे. कोरोना महामारी के दौर जब मंजीत की नौकरी छूट गई, तो उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय करने की सोची. विचारमंथन के दौरान उनका मन भी हुआ कि वह कड़कनाथ मुर्गों का कारोबार करें.

इसके बाद वह मध्यप्रदेश के झाबुआ से जंगली मुर्गे कड़कनाथ की नस्ल लेकर मंडी आए और घर से उनका पालन करते हुए कारोबार शुरू किया. इस कारोबार की सफलता का अनुमान आप इससे लगा सकते हैं कि वह रोजगार के मामले में खुद तो स्वावलंबी बने ही, साथ ही दूसरों को भी रोजगार देने वाले बन गए हैं.

पिता और पत्नी ने बंटाया हाथ
नलसर में अब मंजीत अपने पिता और पत्नी के साथ कड़कनाथ पालन में लगे हुए हैं. मंजीत बताते हैं कि कड़कनाथ की इतनी डिमांड है कि लोग खुद उनके पास आकर कड़कनाथ लेकर जाते हैं. उन्होंने बताया कि एक मुर्गे की कीमत लगभग 2000 रूपये रहती है और इसका एक अंडा 50 से 70 रुपये तक बिक जाता है. कड़कनाथ का अंडा और मांस काफी पौष्टिक माना जाता है. कोरोना काल में इसे बेहतरीन इम्युनिटी बूस्टर (Immunity Booster) के तौर पर देखा गया. स्वादिष्ट होने के साथ ही शक्तिवर्धक होने की वजह से भी इसकी डिमांड ज्यादा है.

देशी गायों का फार्म भी चला रहे
इसके साथ ही मंजीत ने देशी गायों का फार्म भी चलाया है, जिसमें कई प्रकार की देशी गायें रखी गई हैं. मंजीत ने बताया कि नौकरी छूट जाने के बाद उन्होंने स्वाबलंबन की राह अपनाई और आज वे इससे अपने परिवार के साथ-साथ कोट गांव के अन्य बेरोजगारों को भी घर-द्धार रोजगार मुहैया करवा रहे हैं. वहीं मंजीत शर्मा की पत्नी पूजा भी उनका भरपूर सहयोग कर रहीं हैं.

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पत्नी पूजा ने विदेशी परिंदों का कारोबार शुरू किया है.


विदेशी परिंदे भी पालने शुरू किए
पूजा ने भी मंडी में घरों में पालने वाले विदेशी परिंदों का कारोबार शुरू किया है. पूजा ने बताया कि उन्हें भी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है. अब पूजा ने मंडी व आसपास के लोगों को कम कीमत पर विदेशी परिंदे मुहैया करवाने के लिए बर्ड ब्रिडिंग फार्म खोलने का मन भी बना लिया है. बता दें कि मंजीत दिल्ली में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म में कार्य करते थे, लेकिन कोरोना के कारण काम बंद होने की स्थिति में इन्होंने अपना व्यवसाय शुरू कर औरों को भी एक संदेश दिया है.

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