मंडी: दंपति ने लिया देहदान का संकल्प, कहा-शरीर केवल राख का ढेर

उन्होंने कहा कि हमें देहदान करने की प्रेरणा राधास्वामी सत्संग व्यास में देहदान व अंग प्रत्यारोपण अभियान के लिए चलाए गए अभियान और डाक्यूमेंट्री फिल्म से मिली. दंपति ने क्षेत्र के लोगों से भी अपील की है कि पीड़ित मानवता के लिए इस प्रकार के काम के लिए आगे आएं.

Nitesh Saini | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 8, 2019, 1:39 PM IST
मंडी: दंपति ने लिया देहदान का संकल्प, कहा-शरीर केवल राख का ढेर
मंडी के दंपति ने लिया देहदान का संकल्प.
Nitesh Saini
Nitesh Saini | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 8, 2019, 1:39 PM IST
मानवता के लिए शरीर दान करना इंसान के लिए सब से बड़ा पुण्य है. ऐसा ही पुण्य के भागी बने हैं उपमंडल सुंदरनगर का दंपति. दोनों पति-पत्नी ने मरणोपरांत मानवता के लिए अपने शरीर के समस्त अंगदान व देहदान करने का संकल्प लिया है. पति-पत्नी ग्राम पंचायत कपाही के डोढ़वां गांव का रहने वाले हैं. दोनों ने श्रीलाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल नेरचौक जाकर देहदान की सभी औपचारिकताओं को पूरा किया है.

ये बोले दंपत्ति
जानकारी के अनुसार, डोढ़वां निवासी शिक्षा विभाग में कार्यरत बीएससी नान मेडिकल शिक्षक दिलेराम वर्मा(54 वर्ष) व उनकी पत्नी विमला देवी (46वर्ष) ने स्वयं देहदान का निर्णय लिया. दोनों ने कहा कि हमारे शरीर छूटने के बाद शरीर के काम आने वाले अंग आंखें, गुर्दे, ब्रेन पार्ट सहित अन्य अंग जरूरतमंद, असहाय व गरीब लोगों की जान बचाने के काम आएं और उसके बाद उनके शरीर संस्थान में प्रशिक्षण करने वाले प्रशिक्षु डाक्टरों के प्रशिक्षण में काम आएं. उन्होंने कहा कि यह शरीर मृत्यु और दाह संस्कार के बाद केवल राख का ढेर मात्र रह जाता है.

कर्मकांड और मृत्युभोज न किया जाए: दंपति

दंपति का कहना है कि यदि मानव कल्याण में हमारे अंग या देह काम आए तो इससे बढ़कर सौभाग्य की बात क्या हो सकती है. उन्होंने कहा कि देहदान महादान कहा जाता है. इसे महादान की श्रेणी में इसलिए रखा गया है. क्योंकि मृत देह मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु डाक्टरों के लिए एक साइलेंट टीचर की तरह काम आती है। देहदान करने वाली दंपति ने कहा कि मरणोपरांत उनकी देह को तुरंत लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज व अस्पताल नेरचौक पहुंचा दिया जाए. उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के उपरांत रिश्तेदारों से किसी भी प्रकार के शोक समारोह, कर्मकांड, मृत्युभोज और अन्य कार्यक्रम न करने का आह्वान किया है.

यहां से मिली प्ररेणा
उन्होंने कहा कि हमें देहदान करने की प्रेरणा राधास्वामी सत्संग व्यास में देहदान व अंग प्रत्यारोपण अभियान के लिए चलाए गए अभियान और डाक्यूमेंट्री फिल्म से मिली. दंपति ने क्षेत्र के लोगों से भी अपील की है कि पीड़ित मानवता के लिए इस प्रकार के काम के लिए आगे आएं.
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First published: August 8, 2019, 1:31 PM IST
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