मंडी के पैलेस भवन की दुर्दशा पर मंत्री ने लिया संज्ञान, कार्रवाई का दिलाया भरोसा

राजा जोगिंद्र सेन (Raja Joginder Sen) ने इस पैलेस (Mandi Palace) का निर्माण करवाया था. इसके बाद इस पूरे वार्ड को पैलेस कालोनी का नाम मिला. पैलेस में सुरक्षा इतनी पुख्ता होती थी कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 6, 2019, 4:13 PM IST
मंडी के पैलेस भवन की दुर्दशा पर मंत्री ने लिया संज्ञान, कार्रवाई का दिलाया भरोसा
मंडी शहर में बना पैलेस भवन.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 6, 2019, 4:13 PM IST
मंडी. हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर (Mandi City) के ऐतिहासिक पैलेस (Palace) की दुर्दशा पर सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर (Mahender Singh Thakur) ने कड़ा संज्ञान लिया है. मंत्री ने खुद मौके पर जाकर सारी स्थिति का जायजा लेने और उचित कार्रवाई अम्ल में लाने की बात कही है. बता दें कि मंडी शहर के राजपरिवार का ऐतिहासिक पैलेस इस वक्त सोल्जर बोर्ड के हवाले है और इसमें सोल्जर बोर्ड, बीआरओ ऑफिस और आर्मी कैंटीन का संचालन हो रहा है, लेकिन इस ऐतिहासिक भवन की उचित देखभाल न होने के चलते यह खंडहर बनता जा रहा है.

जर्जर हालात में भवन
भवन की दीवारों पर पेड़ और झाडि़यां उग आई हैं. बाहर से भवन काले रंग का हो गया है. इस भवन की दुर्दशा पहले भी मीडिया में उजागर की गई लेकिन सोल्जर बोर्ड (Soldier Board Office) की तरफ से कोई कार्रवाही अम्ल में नहीं लाई गई. अब मामला प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पास पहुंचा है. मंत्री ने तुरंत कार्रवाही का भरोसा दिलाया है.

अब मामला प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पास पहुंचा है.
अब मामला प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पास पहुंचा है.


राजा जोगिंद्र सेन ने बनवाया था पैलेस
बता दें कि राजा जोगिंद्र सेन (Kind Joginder Sen) ने इस पैलेस का निर्माण करवाया था. इसके बाद इस पूरे वार्ड को पैलेस कालोनी का नाम मिला. पैलेस में सुरक्षा इतनी पुख्ता होती थी कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था. दो मंजिला इस पैलेस की उपरी मंजिल में राजा अपने परिवार के साथ रहते थे. धरातल वाली मंजिल पर राजा का कार्यालय चलता था, जहां पर उनके निजी सचिव और अन्य कर्मचारी बैठते थे.

अहम बैठकें होती थी यहां
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मंडी रियासत की महत्वपूर्ण बैठकें इसी पैलेस की ऊपरी मंजिल में हुआ करती थी. जिसे अनुमति मिलती थी वही इस पैलेस में प्रवेश करता था, जबकि इसके अलावा किसी को भी अंदर नहीं आने दिया जाता था. बताया जाता है कि राज परिवार के सदस्यों ने वर्ष 1977 में इस पैलेस को और इसके साथ लगती 7 बीघा जमीन को पूर्व सैनिक लीग को चार लाख रूपयों में बेच दिया. बाद में यह जमीन और पैलेस सोल्जर बोर्ड के अधीन हो गया. सोल्जर बोर्ड का कार्यालय यहीं से चलता है.

पैलेस भवन की दीवारों पर पेड़ और झाडि़यां उग आई हैं.
पैलेस भवन की दीवारों पर पेड़ और झाडि़यां उग आई हैं.


अब सेना के पास
साथ ही आर्मी कैंटीन और सेना भर्ती कार्यालय भी यहीं इसी पैलेस से संचालित हो रहे हैं, लेकिन सोल्जर बोर्ड ने इस ऐतिहासिक पैलेस की मुरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया. स्थानीय निवासी संजीव डिसिल्वा और बीमला देवी ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहर की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा और यह खंडहर बनती जा रही है. इन्होंने इसकी उचित देखभाल करने की मांग उठाई है.बहरहाल, सैनिक कल्याण मंत्री ने उचित कार्रवाही का भरोसा तो दिलाया है लेकिन इंतजार उस पल का रहेगा जब वास्तविकता में इस भवन के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू होगा और लोगों को यह पैलेस सच में पैलेस की तरह नजर आएगा.

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First published: September 6, 2019, 4:05 PM IST
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