लाइव टीवी

हिमाचल में मंडी के पांगणा में पांडवों का आंगन, यहां हुई थी भीम-हिडिम्बा की शादी
Mandi News in Hindi

News18 Himachal Pradesh
Updated: December 13, 2019, 2:09 PM IST
हिमाचल में मंडी के पांगणा में पांडवों का आंगन, यहां हुई थी भीम-हिडिम्बा की शादी
मंडी: पांगणा गांव में पांडवों का आंगन.

पांडवों के समय में पांडवांगण से नाम से मशहूर इस गांव को आज पांगणा के नाम से जाना जाता है.लेकिन अतिक्रमण की मार झेलते-झेलते यह ऐतिहासिक विरासत अब मात्र प्रतीक के तौर पर ही शेष रह गई है.

  • Share this:
मंडी. भारत परंपराओं का देश है और हिमाचल को देव पंरपराओं के लिए जाना जाता है. देव परंपराओं से लाखों लोगों की आस्था (Belief) जुड़ी है. लोगों का अटूट विश्वास ही है, जिसकी वजह से आधुनिकता के तूफान में भी पौराणिक आस्था का झंडा बुलंद है. हिमाचल (Himachal Pradesh) की करसोग घाटी में पौराणिक कथाओं के कुछ सफे खुलते हैं और महा पराक्रमी पांडवों (Pandvas) के पदचिन्ह मिलते हैं.

मंडी जिले की करसोग घाटी देवी-देवताओं और शक्ति स्थलों के लिये जानी जाती है. यहां कई ऐसे पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर हैं. यहां सदियों से आस्था की पताका फहरा रही है. आस्था की यह जड़ें इतनी गहरी हैं कि आधुनिकता का तूफान भी धार्मिक मान्यताओं का आज तक एक पत्ता तक नहीं हिला पाया.

यह है मान्यता
मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहीं पर समय बिताया था और वे यहीं से हिमालय को पार करके उत्तर की ओर गंधमादन पर्वत गए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडव हिमाचल के कई हिस्सों में गये. इन तमाम जगहों से आज भी उनकी कई यादें जुड़ी हैं. ममलेश्वर महादेव मंदिर में पांडव काल का माना जाने वाला 250 ग्राम का गेहूं का दाना और विशाल ढोल आज भी लोगों के लिये आश्चर्य की चीज है.

मान्यता है कि यहां पांडव आए थे.
मान्यता है कि यहां पांडव आए थे.


भीम का विवाह हुआ था यहां
पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों का संबंध करसोग के पांगणा से भी रहा है अज्ञातवास के समय पांडव घूमते-फिरते पांगणा आये थे. पांडवों ने इस गांव में काफी समय गुजारा. इस गांव का नाम पांडवांगण के नाम से पौराणिक कथाओं में वर्णित है. यहां यह भी मान्यता है कि इसी गांव के बीच स्थित इस मंदिर में भीम का विवाह हिडिंबा से हुआ था. इस शिव मंदिर के बाहर स्थित नंदी की ऐसी विशाल मूर्ती करसोग के अन्य किसी मंदिर में नहीं है. इस शिव मंदिर को पांडवों से जोड़ कर देखा जाता है.
पांगणा में मंदिर.
पांगणा में मंदिर.


यह है इतिहास
पांडवों के समय में पांडवांगण से नाम से मशहूर इस गांव को आज पांगणा के नाम से जाना जाता है.लेकिन अतिक्रमण की मार झेलते-झेलते यह ऐतिहासिक विरासत अब मात्र प्रतीक के तौर पर ही शेष रह गई है. पांगणा में पांडवों के आंगन को यहां राज करने वाले सुकेत रियासत के सेन राजा न्याय के मंदिर के रूप में इस्तेमाल करते थे. सन् 765 से लेकर सन् 1948 तक पांगणा सुकेत राजवंश के 52 शासकों की स्थाई और ग्रीष्मकालीन राजधानी रही. सन् 765 में राजा वीरसेन ने सुकेत रियासत की स्थापना की और पांगणा को राजधानी बनाया. 1240 ई. में मदनसेन सुकेत की गद्दी पर बैठे. मदन सेन के शासन काल में पांडवों का पांगणा सुकेत की स्थायी राजधानी रहा.

(रिपोर्ट-चमन शर्मा)

ये भी पढ़ें: PHOTOS: हिमाचल में प्रचंड ठंड, मनाली सहित 5 इलाकों में पारा माइनस में लुढ़का

हिमाचल में बर्फबारी ने रोकी जिंदगी की रफ्तार, 3 हाईवे समेत 195 रोड बंद

शिमला में कोयले की अंगीठी की गैस से दो साल की मासूम बच्ची की मौत

CAB: कांग्रेस को शरणार्थी और घुसपैठिए में फर्क समझना होगा: धूमल

मंडी: उहल के पानी ने दिखाया रंग, 3 सदस्यीय परिवार को आया 37 हजार रुपये बिल

OMG! हिमाचली युवक के फेफड़े में 13 साल से फंसा था पेन का ढक्कन, IGMC ने निकाला

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मंडी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 13, 2019, 1:40 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर