VIDEO : यहां मौजूद है गुरु गोबिंद सिंह जी की 331 साल पुरानी 18 किलो वजनी और 7 फीट लंबी बंदूक

Virender Bhardwaj | News18Hindi
Updated: November 14, 2017, 4:02 PM IST
VIDEO : यहां मौजूद है गुरु गोबिंद सिंह जी की 331 साल पुरानी 18 किलो वजनी और 7 फीट लंबी बंदूक
मंडी में गुरुद्वारे में रखी गुरु गोबिंद सिंह जी की बंदूक.
Virender Bhardwaj | News18Hindi
Updated: November 14, 2017, 4:02 PM IST
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के साथ सिख धर्म का भी विशेष लगाव रहा है. सिक्खों के दसवें गुरू, गुरु गोबिंद सिंह जी 331 वर्ष पहले देवभूमि में न सिर्फ आए थे बल्कि 6 महीनों तक यहां पर रुककर यहां की रक्षा का वचन भी देकर गए थे. आज भी गुरु गोबिंद सिंह जी की प्राचीन स्मृतियां यहां देखने को मिलती हैं.

मनाली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे 21 पर मंडी शहर के साथ ब्यास नदी के किनारे पर स्थित है एक सुंदर का गुरूद्वारा. सुंदरता के साथ-साथ यह गुरूद्वारा प्राचीन एवं ऐतिहासिक भी है. क्योंकि यहां मौजूद हैं गुरू गोबिंद सिंह जी की स्मृतियां.

सन 1686 में मंडी जनपद आए थे गुरु गोबिंद सिंह जी
गुरु गोबिंद सिंह जी वर्ष सन 1686 में मंडी जनपद आए थे. सबसे पहले उनका आगमन रिवालसर में हुआ. वहां से मंडी के तत्कालीन राजा सिद्ध सेन उन्हें पूरे मान सम्मान के साथ मंडी लेकर आए. हालांकि राजा ने उन्हें अपने महल में रखा लेकिन गुरू गोबिंद सिंह जी ने मंडी नगर के बाहर इस स्थान पर रहने का निर्णय लिया. यहां पर वह 6 महीने 18 दिन रुके थे.

भाई हीरा सिंह, हैडग्रंथी, गुरु गोबिंद सिंह गुरुद्वारा बताते हैं कि इस दौरान राजा ने उन्हें जो बंदूक, बारूद भरने की कूपी, पलंग, तलाई और रबाव भेंट की थी, वह आज भी यहां मौजूद है. 331 साल पुरानी बंदूक 18 किलो वजनी है और इसकी लंबाई 7 फीट 4 इंच है.

“जैसे बची है हांडी-वैसे बचेगी मंडी, जो मंडी को लूटेंगे-आसमानी गोले छूटेंगे.’’
गुरु गोबिंद सिंह जब मंडी छोड़कर जाने वाले थे तो उन दिनों राजा को बाहरी आक्रमणों का डर सता रहा था. राजा ने उनसे सुरक्षा का वचन मांगा. राजा को गुरु जी ने अपने अंदाज में वचन दिया.

ब्यास नदी के बीचों-बीच कोलसरा चट्टान पर खड़े होकर एक हांडी नदी में फेंकी. फिर इस हांडी पर बंदूक से निशाना साधा लेकिन हांडी को कुछ नहीं हुआ. इस पर गुरू गोबिंद सिंह जी ने राजा को कहा कि- “जैसे बची है हांडी-वैसे बचेगी मंडी, जो मंडी को लूटेंगे-आसमानी गोले छूटेंगे.’’ गुरू गोबिंद सिंह की कही हुई यह बात इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है.

यही कारण है कि इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में रखी गुरु महाराज की प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मृतियों के दर्शनों के लिए लोग दूर-दूर से यहां खींचे चले आते हैं. सिख श्रद्धालू इन स्मृतियों के दर्शन करके खुद को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं.

मंडी के इस प्राचीन गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के रहने-खाने की पूरी व्यवस्था मौजूद है. यहां 24 घंटे लंगर चला रहता है और श्रद्धालुओं के रहने के लिए सरायों का पूरा प्रावधान है. स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी गुरूद्वारे का संचालन करती है और वर्ष में सिक्ख धर्म के सभी बड़े पर्वों पर यहां भव्य आयोजन किए जाते हैं.
First published: November 14, 2017
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