हाईकोर्ट के निर्देश: नेरचौक मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 अस्पताल से बाहर करने पर विचार करे सरकार
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हाईकोर्ट के निर्देश: नेरचौक मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 अस्पताल से बाहर करने पर विचार करे सरकार
मंडी का नेरचौक मेडिकल क़ॉलेज.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण मार्च 2020 में इस अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल घोषित कर दिया गया था, जिसके कारण नॉन कोविड रोगियों के लिए इस अस्पताल में सभी तरह की स्वास्थय सेवाएं अगले आदेश तक स्थाई रूप से निलंबित कर दी गई है.

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मंडी. हिमाचल हाईकोर्ट ने लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक (Nerchowk) में ओपीडी शुरू करने संबंधी याचिका पर प्रदेश सरकार को निर्देश देते हुए इसे लोगों की मांग के रूप में विचार करने के निर्देश दिए हैं. उच्च न्यायलय ने इस याचिका रूपी मांग पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करके इसका निपटारा करने के निर्देश भी दिये हैं. 14 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई होगी.

कोर्ट में डाली थी याचिका
बता दें कि सुंदरनगर के चांबी निवासी मोहन लाल गुप्ता और चांगर कलौनी निवासी कांता शर्मा ने इस बारे में हाईकोर्ट में लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में स्थापित कोविड-19 अस्पताल को कहीं अन्य जगह शिफ्ट करने और मेडिकल कालेज की सामान्य और एमरजेंसी इंडोर व आउटडोर मेडिकल सेवाएं तत्काल शुरू करने के लिए यह याचिका दायर की थी. बता दें कि स्थानीय विधायक ने भी सरकार से कोविड-19 अस्पताल को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग उठाई है.

दूर-दूर से आते हैं मरीज
बता दें कि नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज 2018 से कार्य कर रहा है. इसमें 500 बेड हैं और करीब 100 प्रशिक्षित और अनुभवी चिकित्सक कार्यरत हैं. मेडिकल कालेज से मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और हमीरपुर जैसे साथ लगते जिलों के लोगों को स्वास्थय सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है. हर दिन यहां पर 1200 से 1500 रोगी उपचार के लिए आते हैं और करीब तीन-चार सौ रोगी इंडोर में रहते हैं. याचिकाकर्ताओं के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण मार्च 2020 में इस अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल घोषित कर दिया गया था, जिसके कारण नॉन कोविड रोगियों के लिए इस अस्पताल में सभी तरह की स्वास्थय सेवाएं अगले आदेश तक स्थाई रूप से निलंबित कर दी गई है.
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