आरटीओ ऑफिस में मांगे जा रहे थे 500 रुपए, कैमरा देखकर भागे RTO

वाहन मालिकों ने बताया कि आरटीओ साहब ने जुर्माने के तौर पर 500 रुपए जमा करवाने को कहा है, तो कैशियर ने उन्हें फाइल पर जुर्माने का हवाला लिखकर लाने को कहा.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 28, 2018, 3:26 PM IST
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 28, 2018, 3:26 PM IST
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के आरटीओ ऑफिस में लोगों से 500-500 रुपये मांगे जा रहे थे. इस दौरान जब मीडिया को मामले की भनक लगी और आरटीओ से सवाल किए तो आरटीओ साहब दफ्तर से भाग गए.

आरटीओ कैमरे के सामने सही से जबाव दिए बिना ही कार्यालय से भाग निकले. सोमवार को आरटीओ मंडी ऑफिस में वाहनों की पासिंग हो रही थी. वाहन मालिक दिन भर कार्यालय में कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करते रहे. इस दौरान कुछ वाहन मालिकों से जुर्माने के तौर पर 500-500 रुपए की राशि जमा करवाने को कहा गया.

कैशियर ने जुर्माना लेने से किया मना
वाहन मालिक जितेंद्र कुमार, गोपाल और रजत ठाकुर सहित अन्य ने बताया कि जब वह कैशियर के पास अपनी फाइल लेकर जुर्माना जमा करवाने गए तो कैशियर ने फाइल ओके बताकर कहा कि उन्हें कोई जुर्माना नहीं देना है. ऐसे में वाहन मालिकों ने बताया कि आरटीओ साहब ने जुर्माने के तौर पर 500 रूपए जमा करवाने को कहा है, तो कैशियर ने उन्हें फाइल पर जुर्माने का हवाला लिखकर लाने को कहा. वाहन मालिक फिर से आरटीओ के पास गए तो उन्होंने वाहन मालिकों को न तो फाइल पर लिखकर दिया और न ही संतोषजनक जबाव दिया.

मीडिया कर्मियों को कैबिन में बुलाया
जब इस बात की खबर मीडिया कर्मियों को लगी तो उन्होंने कार्यालय में आकर इसकी जांच पड़ताल करनी चाही. कार्यालय परिसर में पहुंचने के बाद जब आरटीओ से पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार किया और पूरी बात किए बिना ही कार्यालय चले गए.

कुछ देर बाद उन्होंने मीडिया कर्मियों को अपने केबिन में बुलाया और कैमरे के बिना बात करने को कहा, लेकिन मीडियाकर्मियों ने सारी बात ऑन रिकार्ड करने की बात कही तो आरटीओ कृष्ण चंद अपने कार्यालय से भाग गए. हालांकि, गाड़ी के पास भी उनसे अपना सही अधिकारिक वर्जन देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने कोई भी उत्तर दिए बिना वहां से भागना ही उचित समझा.

कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
अभी यह संशय बना हुआ है कि ऐसा कौन सा जुर्माना मांगा जा रहा था जिसे लेने से कैशियर भी इनकार कर रहा था. इस बात का कोई भी संतोषजनक जबाव न मिलने के कारण आरटीओ की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

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