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नहीं रहे 98 वर्षीय आजाद हिंद फौज के सेनानी शेर सिंह, बोस ने दी थी शेर-ए-हिन्द की उपाधि

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 12, 2020, 10:58 AM IST
नहीं रहे 98 वर्षीय आजाद हिंद फौज के सेनानी शेर सिंह, बोस ने दी थी शेर-ए-हिन्द की उपाधि
सरकाघाट में शेर सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए.

Sarkaghat Freedom Fighter Death: स्वर्गीय शेर सिंह 94 वर्ष की आयु तक हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के उपमण्डल स्तर के समारोह में भाग लेते थे. प्रशासन द्वारा उनको सम्मानपूर्वक घर से लाया और छोड़ा जाता था.

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सरकाघाट (मंडी). नेता जी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) की आज़ाद हिंद फौज के वीर सैनिक (Freedom Fighter) शेर सिंह का निधन हो गया. मंगलवार सुबह अपने पैतृक गांव में अंतिम सांस ली. मंडी जिले के सरकाघाट की परसदा हवानी पंचायत के त्रिलोचन कोठी गांव के निवासी शेर सिंह 98 वर्ष के थे. वह पिछले 2 साल से बीमार चल रहे थे और उनके इलाज का सारा खर्चा सरकार द्वारा वहन किया गया.

25 साल की उम्र में बोस की सेना में गए
मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. शेर सिंह पुत्र नरपत राम 25 वर्ष की आयु में ही नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे. उसके बाद अंग्रेजों के विरुद्ध रंगून और वर्मा में आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने बहादुरी से अंग्रेजी सेना से लोहा लिया था. उनकी बहादुरी को देखते हुए नेता जी ने उन्हें शेर-ए-हिन्द की उपाधि से विभूषित किया था.

सरकाघाट: राजकीय सम्मान के साथ शेर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया.
सरकाघाट: राजकीय सम्मान के साथ शेर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया.


दो साल वर्मा में रहे
बाद में ये अपनी सैन्य टुकड़ी से बिछुड़ गए और दो वर्षों तक वर्मा के जंगलों की खाक छानते रहे. बाद में जब भूखे प्यासे अपने घर पहुंचे तो उस समय देश आजाद हो चुका था और वे अपनी खेतीबाड़ी और घर गृहस्थी बसाने में लग गए. जब भारत सरकार ने आज़ाद हिंद फौज के वीर सैनिकों को उनकी देश के प्रति की गई सेवाओं के लिए पेंशन दी तो सम्मान पूर्वक अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करने लगे.

सरकाघाट में पैतृक गांव में शेर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया.
सरकाघाट में पैतृक गांव में शेर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया.
विशिष्ट अतिथि का दर्जा
स्वर्गीय शेर सिंह 94 वर्ष की आयु तक हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के उपमण्डल स्तर के समारोह में भाग लेते थे. प्रशासन द्वारा उनको सम्मानपूर्वक घर से लाया और छोड़ा जाता था. समारोह में उन्हें विशिष्ट अतिथि का दर्जा दिया जाता था. सुबह जब स्थानीय प्रशासन को उनके देहावसान का समाचार मिला तो एसडीएम जफ़र इक़बाल, डीएसपी चन्दरपाल सिंह और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उनकी अंतिम विदाई में भाग लिया. प्रशासन ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया. इनके देहावसान पर कर्नल बाला राम, कैप्टन सुरेंद्र सिंह, कैप्टन वीर सिंह, कैप्टन प्रकाश सिंह, कैप्टन रघुवीर सिंह, समाजसेवी सोहन सिंह हाज़री, मंगत राम नेगी सहित अन्य ने गहरा शोक प्रकट किया.

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First published: February 12, 2020, 10:58 AM IST
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