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मंडी के 61 वर्षीय राष्ट्रपति अवॉर्ड विजेता बली राम, जिन्होंने खूनी नहर में बचाई कई जानें
Mandi News in Hindi

Nitesh Saini | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 21, 2020, 5:40 PM IST
मंडी के 61 वर्षीय राष्ट्रपति अवॉर्ड विजेता बली राम, जिन्होंने खूनी नहर में बचाई कई जानें
सुंदरनगर के बलि राम.

बलि राम ने कहा कि उन्हें आजतक हिमाचल प्रदेश सरकार और बीबीएमबी प्रबंधन द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया. उन्होंने बीबीएमबी प्रबंधन से उनकी सुरक्षा के लिए लाइफ सेविंग किट मांगी थी लेकिन नसीब नहीं हुई.

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सुंदरनगर (मंडी). हिमाचल प्रदेश के मंडी (Mandi) जिले में सुंदनगर में बीएसएल को खूनी नहर (Bloody Canal) कहा जाता है. इस नहर में कई लोगों की जिंदगी को निगला है. लेकिन मंडी (Mandi) जिला का एक 61 वर्षीय बलि राम ने नहर में डूबते कई लोगों की जान बचाई है. उनकी इस जांबाजी के लिए उन्हें राष्ट्रपति जीवन रक्षक अवार्ड से समानित भी कर चुके हैं. हालांकि, आज तक प्रदेश सरकार और बीबीएमबी (BBMB) प्रशासन ने उनकी अनदेखी की और इसका उन्हें मलाल है.

नहर किनारे बिस्तर पर दुकान
मंडी जिला के बल्ह उपमंडल की ग्राम पंचायत सलवाहण के बली राम पुत्र संतु राम निवासी गांव राओ, दयारगी बल्ह, मंडी 1977 से अब तक लगभग 70 से अधिक लोगों और 500 जानवरों को जिंदा और 20 शवों को नहर से बाहर निकाल चुके हैं. बली राम राओ पुल के पास एक छोटी सी दुकान में ही बिस्तर लगाकर कर गुजर बसर कर अपने परिवार का पेट पालते हैं.

बलि राम नहर किनारे दुकान चलाते हैं.
बलि राम नहर किनारे दुकान चलाते हैं.




2009 में मिला था ईनाम
बली राम निजी तौर पर पिछले कई दशकों से बिना किसी सरकारी मदद के इस कार्य में निरंतर लगे हुए हैं. उन्होंने बताया कि कहा कि उन्हें वर्ष 2009 में राष्ट्रपति ने जीवन रक्षा पदक और 30 हजार रुपये ईनाम भी दिया था. उनके परिवार में पत्नी और 2 बेटे, बहुएं और पोता और पोती हैं. सब का खर्चा इसी छोटी सी दुकान से चल रहा है. बलि राम ने बताया कि दुकान में रखी रस्सियों के सहारे वह जान जोखिम में डालकर नहर में गिरने वाले लोगों और जानवरों की को बाहर निकालते हैं.

सुंदरनगर की खूनी नहर.
सुंदरनगर की खूनी नहर.


बलि राम ने कहा कि उन्हें आजतक हिमाचल प्रदेश सरकार और बीबीएमबी प्रबंधन द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया. उन्होंने बीबीएमबी प्रबंधन से उनकी सुरक्षा के लिए लाइफ सेविंग किट मांगी थी लेकिन नसीब नहीं हुई.

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First published: February 21, 2020, 5:40 PM IST
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