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सुंदरनगर को नीदरलैंड बनाने की मुहिम फेल, शहर में चारों ओर फैला कचरा

डंपिंग साइट
डंपिंग साइट

वर्ष 2014 में हिमाचल सरकार के शहरी विभाग द्वारा डच कंपनी नेक्सन नोवस कंपनी से हुए इकरार के तहत सुंदरनगर को नीदरलैंड की तर्ज पर विकसित करने की कवायद शुरु की गई थी.

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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जिया उड़ाई जा रही हैं. आलम यह है कि दशकों पुरानी चंदपुर डंपिंग साइट में पिछले कई वर्षो से कूड़ा डाला जा रहा है. इस डंपिंग साइट में हजारों टन कूड़ा इकट्ठा हो चुका है. यहां जमा मलबे के निष्पादन के लिए शहरी विकास विभाग के तमाम दावे झूठे साबित हो रहे हैं. अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए अब डंपिंग साइट से सड़े-गले कूड़े को साथ लगती घांघल खड्ड में डंप किया जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से यहां जमे हुए कूड़े को बीबीएमबी मशीनरी साथ लगती खड्ड में धकेलने में जुटी हुई है. अभी तक बीबीएमबी मशीनरी द्वारा हजारों टन कचरा घांघल खड्ड में फेंका जा चुका है. यह क्रम लगातार जारी है. गत माह बीबीएमबी ने सुंदरनगर, सलापड़ व पंडोह में स्वच्छता अभियान चलाया था, लेकिन डंपिंग साइट का कचरा खड्ड में धकेलने और पांच दशक में कोई भी अपनी कूड़ा निष्पादन की कोई योजना ना बनाने से प्रबंधन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है. ऐसे में प्रबंधन द्वारा किए जा रहे तमाम स्वच्छता के दावे खोखले नजर आ रहे है.

मॉडल टाउन बनाने की मुहिम हुई फेल, करोड़ों हुए बर्बाद

वर्ष 2014 में हिमाचल सरकार के शहरी विभाग द्वारा डच कंपनी नेक्सन नोवस कंपनी से हुए इकरार के तहत सुंदरनगर को नीदरलैंड की तर्ज पर विकसित करने की कवायद शुरु की गई थी. इसके तहत नीदरलैंड से तकनीकी सहयोग से शहर को कचरा मुक्त करने, ठोस कचरा प्रबन्धन, मल निकासी, ऊर्जा संरक्षण व क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयो पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने थे. इस योजना के सर्वे के लिए ही 50 लाख रुपए का प्रावधान किया गया.



वर्ष 2014 में शहरी विभाग के निदेशक सहित जिला प्रशासन ने सुंदरनगर को मॉडल सिटी बनाने के लिए नीदरलैंड फिजीबिलिटी सर्वे टीम व स्वयं सेवकों संग सर्वेक्षण किए थे, लेकिन नीदरलैंड की तर्ज पर सुंदरनगर आज तक मॉडल टाउन के रूप में विकसित नहीं हो पाया है.
खड्ड में डंप करने से लाखों की जान पर मंडराता खतरा

डंपिंग यार्ड की गंदगी खुलेआम खड्ड में फेंकने से यह बरसात में बह कर घांघल खड्ड, लिंड्डी खड्ड, सुकेती, कंसा व अन्य खड्डों का पानी व विभिन्न पेयजल योजनाओ को दूषित करते हुए ब्यास दरिया में जाकर मिलेगी और यह दूषित पानी आगे बहता हुआ दूसरे राज्यों में भी पहुंचेगा. कूड़े में मिले रसायनिक तत्व खेतों में घुसकर जल व जिंदगी तबाह कर सकेगी.

क्या कहती है सुंदरनगर नगरपरिषद

सुंदरनगर नगरपरिषद के कार्यकारी अधिकारी अशोक शर्मा का कहना है कि एनजीटी के दिशानिर्देश व शहरी विकास विभाग के सहयोग से पॉलिवेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के तहत शहर के हर घर से नप के वाहनों द्वारा डोर टू डोर कूड़ा उठाया जा रहा है. सभी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया गया है. इसके उपरांत एकत्रित किया गया कूड़ा वाहनों के माध्यम से डंपिंग साईट पर पहुंचाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि डंपिंग साईट पर कई वर्षों से पड़े हुए कूड़े को साफ करने के लिए सरकार की सहायता ली जा रही और सरकार की तरफ से ट्रॉमेल, कंपैक्टर सहित इंसिनेटर मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही है. इन्हें जल्द की डंपिंग साईट पर स्थापित किया जाएगा. अभी मैनुअल तरीके से डंपिंग साईट पर काम किया जा रहा है, लेकिन फिर भी डंपिंग साईट खाली नही हो रही है जिसके लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं. अशोक शर्मा ने कहा कि ना गलने व सडऩे वाला कूड़ा बिलासपुर जिला के बरमाणा सीमेंट फैक्ट्री को उपयोग के लिए भेजा रहा है.

जल्द एनजीटी से की जाएगी इसकी शिकायत

जुगाहन पंचायत उपप्रधान श्याम लाल ने कहा है कि पिछले लंबे समय डंपिंग साईट के कूड़े के समाधान की मांग की जा रही. लेकिन ना तो बीबीएमबी ना ही प्रशासन इस सन्दर्भ में कोई ठोस योजना नही बना पाई है. इसके चलते दर्जनों गावों के हजारों वाशिंदे दूषित वातावरण में जीने को मजबूर हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले को सरकार और प्रसाशन के सामने कई बार उठा चुके हैं लेकिन समस्या का हल नहीं निकल पाया है, अब जल्द ही मामले की शिकायत एनजीटी से की जाएगी.

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