IPH टैंक से पानी नहीं कर पाया शुरू तो दानकर्ता को ही ठहराया दोषी

यहां आईपीएच विभाग ने वर्ष 2016 में लाखों रुपए खर्च करके पानी के टैंक का निर्माण करवाया. 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी इसे शुरू नहीं किया जा सका है.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 13, 2019, 1:31 PM IST
IPH टैंक से पानी नहीं कर पाया शुरू तो दानकर्ता को ही ठहराया दोषी
मंडी के कोठीगैहरी पंचायत के गंभरखड्ड गांव में चार साल पहले बने टैंक में आज तक पानी नहीं पहुंचाया जा सका है.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 13, 2019, 1:31 PM IST
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह उपमंडल की कोठी गैहरी पंचायत के गंभरखड्ड गांव में आईपीएच विभाग की नाकामी का मामला सामने आया है. यहां विभाग ने वर्ष 2016 में लाखों रुपए खर्च करके पानी के फिल्टर टैंक का निर्माण करवाया ताकि गांव में चल रही पानी की किल्लत को दूर किया जा सके. लेकिन 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस टैंक को विभाग शुरू नहीं कर पाया है. टैंक निर्माण के लिए गांव के परम देव ने अपनी 5 बिस्वा भूमि भी विभाग को दान में दी. जमीन पर कंक्रीट का ढांचा तो खड़ा कर दिया, लेकिन अब यह खंडहर बनता जा रहा है.

टैंक में उग आई झाड़ियां और घास



water crises-जल संकट
मंडी के कोठीगैहरी पंचायत के गंभरखड्ड गांव के एक व्यक्ति ने टैंक निर्माण के लिए दान में अपनी पांच बिस्वा जमीन आईपीएच विभाग को दी.


आलम यह हो गया है कि टैंक में झाड़ियां और घास उग आई हैं, जिसके चलते यह टैंक जर्जर होता जा रहा है. जमीन दान करने वाले परम देव की मानें तो उन्होंने टैंक को शुरू करवाने के लिए विधायक से लेकर आईपीएच मंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की. परम देव का कहना है अगर विभाग टैंक को शुरू नहीं कर सकता तो इसे तोड़कर जमीन वापिस की जाए, ताकि जमीन का कृषि के लिए उपयोग किया जा सके. परम देव ने विभाग को भी एप्लिकेशन दे रखी है जिसके जबाव का इंतजार है.

पानी की बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण

गंभरखड्ड गांव में पानी की बात की जाए तो यहां के बाशिंदे पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे हैं. ग्रामीण हिमा देवी और रि. सूबेदार गुरदेव शर्मा ने बताया कि गांव में सप्ताह में एक बार पानी की सप्लाई आ रही है. किसी को पानी मिल जाता है और कोई बगैर पानी के रह जाता है. प्राकृतिक जल स्त्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि टैंक के कारण इस गांव को ब्रिक्स की स्कीम से भी हाथ धोना पड़ा है. इन्होंने सरकार से गांव में ब्रिक्स की स्कीम के तहत काम करने की गुहार लगाई है.

'टैंक में दानकर्ता ही नहीं डालने दे रहा है पानी'
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वहीं जब इस बारे में आईपीएच विभाग बग्गी डिवीजन के एक्सईएन छबील चंद से बात की गई तो उन्होंने टैंक के शुरू न होने के लिए जमीन दानकर्ता को ही दोषी बताया. उन्होंने कहा कि जिसने जमीन दान दी है वही टैंक में पानी नहीं डालने दे रहा है. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मामले को सुलझाकर टैंक को सुचारू कर दिया जाएगा.

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