नियुक्ति में धोखाधड़ी का शिकार हुआ यह परिवार, 12 वर्ष से नहीं मिला न्याय

वर्षों से दर-दर की ठोंकरे खाने और न्याय नहीं पाने के चलते पति-पत्नी दोनों ही मानसिक तौर पर परेशान हो गए हैं.

Nitesh Saini | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 25, 2019, 8:23 PM IST
नियुक्ति में धोखाधड़ी का शिकार हुआ यह परिवार, 12 वर्ष से नहीं मिला न्याय
अति शर्मा और राजेंद्र शर्मा न्याय पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं
Nitesh Saini
Nitesh Saini | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 25, 2019, 8:23 PM IST
हिमाचल के मंडी जिले का एक परिवार पिछले 12 साल से दर-दर की ठोकरें खा रहा है. मंडी जिला के सरकाघाट के नौबाही निवासी पीड़िता अति शर्मा और उनके पति राजेंद्र शर्मा न्याय पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. राजेंद्र शर्मा की पत्नी ने 2003, 2005 और 2007 में निदेशक तकनीकी शिक्षा सुंदरनगर में इंस्ट्रक्टर इंब्राइडरी पद के लिए इंटरव्यू दिया था. आरोप है कि उनके साथ धोखधड़ी करके नौकरी किसी और को दे दी गई. वर्षों से दर-दर की ठोकरें खाने और न्याय नहीं पाने के चलते पति-पत्नी दोनों ही मानसिक तौर पर परेशान हो गए हैं.

पूरे हैं दस्तावेज, तीन बार हुआ इंटरव्यू

उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया के लिए दस्तावेज पूरे होने के बावजूद और तीन बार इंटरव्यू देने के बाद भी उनकी पत्नी का चयन नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आवेदक को संबंधित पोस्ट के लिए एक्सपीरियंस प्रतिवर्ष के हिसाब से एक अंक मिलना था और उनकी पत्नी के पास 4 वर्ष का एक्सपीरियंस था.

आरटीआई से पता चला एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट में हुई धांधली

उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में इंटरव्यू देने के बाद उनके द्वारा विभिन्न विभागों से आरटीआई में दस्तावेज प्राप्त किए गए. उन्होंने कहा कि आरटीआई में दस्तावेज मिलने के बाद उनके पैरों के तले जमीन खिसक गई. उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में इंटरव्यू के दौरान चयनित आवेदकों द्वारा पेश किए गए एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट में धांधली होना पाया गया.

6 आवेदकों के खिलाफ इन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज

राजेंद्र शर्मा ने कहा कि इस मामले को वे वर्ष 2012 में हाईकोर्ट लेकर पहुंचे. हाईकोर्ट ने मामले को लेकर निचली अदालत में केस दायर करने को कहा. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वर्ष 2016 में 6 आवेदकों के खिलाफ एक शिकायत विजीलेंस विभाग को प्रेषित की गई. इस पर विजीलेंस विभाग मंंडी ने मात्र एक आवेदक के खिलाफ 26 मार्च 2018 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468,471,120-बी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई.
एक साल बाद भी नहीं हुई पूरी विजिलेंस जांच

उन्होंने कहा कि इस प्राथमिकी मेें चयनित आवेदक को गलत एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर सचिव ग्राम पंचायत सासन व खंड विकास अधिकारी, विकास खंड हमीरपुुुर को भी आरोपी बनाया गया. उन्होंने कहा कि मामले में एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक विजिलेंस विभाग द्वारा जांच पूरी नहीं हो पाई है. उन्होंने कहा कि पीड़िता व उनका परिवार विजिलेंस विभाग की जांच से संतुष्ट नहीं है.

नियुक्ति की उम्र पार कर चुके पति-पत्नी

राजेंद्र शर्मा ने कहा कि अब उनकी पत्नी की आयु 45 वर्ष पार होने के कारण नौकरी के लिए उम्र की सीमा पार हो गई है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार से 12 वर्षों से न्याय के लिए दर-दर भटकने को लेकर विभिन्न विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली जग-जाहिर हो गई है.

विजिलेंस विभाग के डीएसपी ने कहा- जांच लगभग पूरी हो चुकी है

मंडी के विजिलेंस विभाग के डीएसपी कुलभूषण वर्मा ने इस मामले में कहा कि विभाग की जांच लगभग पूरी हो चुकी है. जल्द ही चालान तैयार कर न्यायालय में पेश कर दिया जाएगा. अन्य लोगों के खिलाफ दी गई शिकायत को लेकर भी जांच जारी है.

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