MissonPaani: प्राकृतिक जलस्रोतों का शहर छोटी काशी मंडी, IIT के साथ होगा जीर्णोद्धार

आईआईटी और इंटेक संस्था इसपर कार्य कर रही है और जल्द ही इनके साथ बैठक करके प्लान की आगामी रूपरेखा बनाई जाएगी.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 8, 2019, 4:22 PM IST
MissonPaani: प्राकृतिक जलस्रोतों का शहर छोटी काशी मंडी, IIT के साथ होगा जीर्णोद्धार
मंडी में बहुत से जलस्रोत सुखने की कगार पर हैं.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 8, 2019, 4:22 PM IST
छोटी काशी के नाम से मशहूर हिमाचल का मंडी शहर प्राकृतिक जल स्त्रोतों का शहर है. यहां प्रकृति ने स्वच्छ पेयजल के रूप में अपना अपार भंडार लुटाया है, लेकिन उचित रख रखाव न होने के कारण अधिकतर पेयजल स्त्रोत सूख चुके हैं और कुछ सूखने की कगार पर हैं. इस शहर में 50 से 100 मीटर के दायरे में आपको कोई न कोई प्राकृतिक जल स्त्रोत मिल जाएगा, जहां आप आसानी से अपनी प्यास बुझा सकते हैं. अधिकरत जल स्त्रोत राजाओं के समय में बने हैं और इनकी बनावट में राजशाही आज भी झलकती है.

पानी लेने रोजाना आते हैं लोग
वरिष्ठ नागरिक बीरबल शर्मा बताते हैं कि मंडी शहर में शिवा बावड़ी, डिबा बावड़ी, जैंचू नौण, पैहरों की बायं और छाया बायं सहित दो दर्जन बड़े प्राकृतिक जल स्त्रोत मौजूद हैं. पूरा मंडी शहर इन्हीं प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर निर्भर रहता है. हालांकि सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग (आईपीएच) ने हर घर में नल लगाकर पानी पहुंचा दिया है, लेकिन लोग पीने के लिए आज भी इन्हीं प्राकृतिक जल स्त्रोतों के पानी का इस्तेमाल करते हैं. शहर में अभी अगर जल संकट आ जाए तो फिर इन स्त्रोतों के पास लोगों को जमघट लग जाता है, क्योंकि साफ पानी के सिर्फ यही स्त्रोत आपात स्थिति में मौजूद रहते हैं.

गर्मियों में ठंडा सर्दियों में गुनगना

स्थानीय निवासी कर्म सिंह और बिट्टू बताते हैं कि इस पानी की अपनी एक अलग खासियत होती है. गर्मियों में इन स्त्रोतों से ठंडा पानी मिलता है जबकि सर्दियों में गुनगुना, इसलिए लोग वर्ष भर इन स्त्रोतों के पानी का जमकर इस्तेमाल करते हैं. नगर परिषद और स्थानीय संस्थाएं लोगों की सहभागिता से समय-समय पर इनकी साफ सफाई भी करती रहती हैं, ताकि लोगों को साफ पानी पीने के लिए मिल सके.

80 प्रतिशत जल स्त्रोत समाप्त
अब इन जल स्त्रोतों के दूसरे पहलू पर भी नजर दौड़ा लेते हैं. प्रकृति ने यदि इंसान को यह नायाब तोहफा दिया है तो क्या इंसान इनकी सही ढंग से देखभाल कर भी रहा है या नहीं. अगर मंडी के दृश्य को देखें तो शायद ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा. एक सर्वे की मानें तो मंडी शहर और इसके आसपास 100 के करीब प्राकृतिक जल स्त्रोत मौजूद हैं, लेकिन इनमें से 80 प्रतिशत समाप्त हो चुके हैं. कुछ गलत निर्माण के कारण सूख गए तो कुछ सीवरेज की गंदगी के कारण दूषित हो गए प्राकृतिक जल स्त्रोतों के संरक्षण को लेकर आवाज उठाने वाले अधिवक्ता समीर कश्यप बताते हैं कि इस दिशा में सरकार को समय रहते उचित कदम उठाने होंगे तभी इनका सही ढंग से जीर्णोद्धार हो पाएगा.
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समीर कश्यप के अनुसार प्रकृति के दिए इस नायाब तोहफे की आज कद्र करने की जरूरत है तभी हम भावी पीढ़ियों तक पीने का साफ पानी पहुंचा सकेंगे. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले इस प्रकार के प्राकृतिक जल स्त्रोत स्थानीय निकायों के अधीन होते हैं. इनका रख रखाव और जीर्णोद्धार का कार्य संबंधित नगर निकाय या ग्राम पंचायत का होता है. मंडी शहर के तहत आने वाले प्राकृतिक जल स्त्रोतों की रख रखाव नगर परिषद मंडी करती है.

आईआईटी मंडी के साथ मिलकर प्लान : नगर परिषद
नगर परिषद मंडी के कार्यकारी अधिकारी बी.आर. नेगी की मानें तो दूषित हो चुके या सूख चुके जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए आईआईटी मंडी के साथ मिलकर प्लान बनाया जा रहा है. आईआईटी और इंटेक संस्था इसपर कार्य कर रही है और जल्द ही इनके साथ बैठक करके प्लान की आगामी रूपरेखा बनाई जाएगी.

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First published: July 8, 2019, 12:56 PM IST
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