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मंडी में खुला प्रदेश का दूसरा शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पाद विक्रय केंद्र

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: December 2, 2019, 11:01 PM IST
मंडी में खुला प्रदेश का दूसरा शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पाद विक्रय केंद्र
डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने किया 'आजीविका विक्रय केंद्र' का विधिवत शुभारंभ

शून्य लागत प्राकृतिक खेती (Natural Farming ) में देसी गाय के गोबर व गोमूत्र तथा स्थानीय पेड़ पौधों की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है. रासायनिक खाद व कीटनाशकों का उपयोग न करने के कारण इसे जहरमुक्त खेती भी कहा जाता है.

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मंडी. राज्य सचिवालय शिमला (Shimla) के बाद मंडी (Mandi) में प्रदेश का दूसरा शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पाद विक्रय केंद्र (Zero Cost Natural Farming Product Sales Center ) खुल गया है. गौरतलब है कि प्रदेश सरकार हर जिले में शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए बिक्री केंद्र खोलने पर जोर दे रही है. मंडी जिला प्रशासन ने इसमें पहल करते हुए इंदिरा मार्केट परिसर में बिक्री केंद्र खोला है. डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने सोमवार को ‘आजीविका विक्रय केन्द्र’ (Aajivika Vikray Kendra) के नाम से स्थापित इस केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया. जिला में प्राकृतिक खेती में जुटे किसान जो भी उत्पाद उगाएंगे, वह लोगों को इस विक्रय केंद्र पर खरीदने को मिलेंगे.

किसानों को मिलेगा उत्पादों की बिक्री के लिए उचित मंच

डीसी मंडी ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जिला में यह विक्रय केन्द्र राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत खोला गया है. इसका उद्देश्य शून्य लागत प्राकृतिक खेती में लगे किसानों को प्रोत्साहन देना और लोगों को केमिकल स्प्रे व दवाइयों से मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाना है. आजीविका विक्रय केन्द्र के जरिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पादों की बिक्री के लिए उचित मंच मिलेगा. उन्होंने बताया कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती के माध्यम से मंडी जिला के 3770 किसान कुल 262 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इसके लाभ व शून्य लागत को देखते हुए और किसान भी इसे अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

प्राकृतिक खेती से उगाए गए उत्पादों की लोग आसानी से कर सकेंगे खरीददारी


इसे जहरमुक्त खेती भी कहते हैं

बता दें कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर व गोमूत्र तथा स्थानीय पेड़ पौधों की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है. रासायनिक खाद व कीटनाशकों का उपयोग न करने के कारण इसे जहरमुक्त खेती भी कहा जाता है.

आजीविका विक्रय केंद्र पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी बेचे जाएंगे. इसके लिए अभी विकास खंड सदर में ‘नैना खंड स्तरीय फेडरेशन’’ का गठन किया गया है, जिसमें 50 ग्राम संगठन में शामिल किए गए हैं. इसके तहत 762 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं. इनके उत्पादों को भी यहां पर बेचा जाएगा. जल्द ही जिलास्तर पर इसी प्रकार से एक वृहद फेडरेशन का गठन किया जाएगा.ये भी पढ़ें - मंत्रिमंडल विस्तार पर बोले धवाला : बनाएंगे तो ठीक है, नहीं बनाएंगे तो भी ठीक

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First published: December 2, 2019, 11:01 PM IST
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