श्रीखण्ड महादेव यात्रा: 10 साल में 41 श्रद्धालुओं की मौत

श्रीखंड महादेव पर 72 फीट की शीला है, जिसे शिवलिंग माना गया है और इसके दर्शन के लिए लोग यहां दूर-दूर से पहुंचते हैं. यहां पहुंचने के लिए तीन दिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 1:15 PM IST
श्रीखण्ड महादेव यात्रा: 10 साल में 41 श्रद्धालुओं की मौत
श्रीखंड महादेव कुल्लू जिले में स्थित है.
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Updated: July 29, 2019, 1:15 PM IST
हिमाचल के कुल्लू जिले के निरमंड में आयोजित की गई श्रीखंड यात्रा खत्म हो गई है. 15 से 25 जुलाई तक यह यात्रा की गई और 25 जुलाई को अंतिम जत्था रवाना किया गया है, जो 31 जुलाई तक लौटेगा. इस बार इस यात्रा में 4 लोगों की मौत हुई है. रविवार को तीन लोगों की जान गई है. जबकि एक शख्स की मौत शुरूआती दौर में ही हो गई थी.

आंकड़ों के अनुसार, 2010 के बाद अब तक करीब 41 यात्री की इस यात्रा के दौरान ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड, दिल का दौरा पड़ने या फिर गिरकर मौत हुई है. मरने वालों में ज्यादातर 20 से 40 वर्ष या फिर 55 से ज्यादा आयु के यात्री हैं. इसका मुख्य कारण इस कठिनतम यात्रा को हल्के में लेना पाया गया है.

32 किमी पैदल चढ़ाई
यह यात्रा बेसकैम्प सिंहगाड से करीब 32 किलोमीटर की कठिन पगडंडी से सीधा चढ़ाई में पूरी की जाती है. पार्वतीबाग से आगे श्रीखण्ड तक बेहद सीधी चढाई और बर्फ के ग्लेशियरों को पार करके जाना होता है. यहां रास्ता या तो बर्फ पर होकर है या फिर पथरीला और संकरा है. अत्यधिक ऊंचाई और बर्फ होने के कारण अक्सर यात्री सांस की दिक्कत का सामना करते हैं, जबकि शारीरिक और मानसिक रूप से कुछ कमजोर लोग इस कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते और या तो बीमार हो जाते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है.

मेडिकल जांच होती है, लेकिन
प्रशासन हर साल इस यात्रा के दौरान बेसकैम्प सिंहगाड में यात्रियों की मेडिकल जांच के बाद ही पंजीकरण करने के बाद यात्रा पर जाने की अनुमति देता है. बावजूद इसके बहुत से यात्री अपनी शारीरिक कमजोरियों या अंदरूनी बीमारियों को हल्के में लेते हैं और शिव भोले में असीम आस्था के चलते प्रशासन के बार बार चेताने के बावजूद इस यात्रा पर निकल पड़ते हैं. इस यात्रा के दौरान यात्री बहुत जल्दी-जल्दी ऊंचाई पर पहुंचते जाते हैं और अचानक बदल रहे वातावरण, जलवायु में खुद को ढाल नहीं पाते हैं.

जल्दबाजी न करें लोग
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अनुभवी लोगों का कहना है कि यात्रा को बेहद ही आराम से तय करना चाहिए. हर पड़ाव पर आराम करना चाहिए और अगर शरीर साथ न दे तो यात्रा पर या तो जनता नहीं चाहिए या वापिस आ जाना चाहिए. अधिकांश युवा इस यात्रा को जल्द से जल्द पूरा करने के अपने दिखावे या जुनून के आगे मौत को गले लगा रहे हैं. यात्रा के दौरान यात्री नशे खासकर भांग का सेवन करके निकलते हैं, और यह भी कइयों की मौत का कारण हो सकता है.

बता दें कि श्रीखंड महादेव पर 72 फीट की शीला है, जिसे शिवलिंग माना गया है और इसके दर्शन के लिए लोग यहां दूर-दूर से पहुंचते हैं. यहां पहुंचने के लिए तीन दिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है.

(आनी से जितेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट)

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First published: July 29, 2019, 12:17 PM IST
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