अब चूड़धार की राह होगी आसान: नौहराधार से भोले के दर तक 14 किमी ट्रैक रूट होगा विकसित

सिरमौर का फेमस टूरिस्ट स्पॉट चूड़धार.
सिरमौर का फेमस टूरिस्ट स्पॉट चूड़धार.

Chuddaar in Sirmour: शिरगुल स्थली चूड़धार में न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है. श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जोरदार घाटी की राह कठिन होने के बावजूद यहां लगातार श्रद्धालु पहुंचते है. यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है.

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नाहन. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर (Sirmour) जिला की सबसे ऊँची चोटी पर लाखों लोगों की आस्था के केंद्र प्रसिद्ध चूड़धार (Chuddaar) नई राहें-नई मंजिलें योजना के तहत विकसित किया होगा. इस पर करोड़ों की राशि खर्च होगी. दरअसल, नई राहें-नई मंजिलें योजना अनछुए पर्यटन स्थलों (Tourist Place) को विकसित करने के लिए सरकार की एक प्रमुख योजना है. योजना के तहत जिला सिरमौर (Sirmour) में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही है.

चूड़धार का चयन किया

योजना के तहत शिरगुल महाराज की तीर्थ स्थली और पर्यटकों का  आकर्षण केंद्र चूड़धार का चयन किया गया. पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से नौहराधार से चूड़धार तक ट्रेकरूट बनाया जाएगा. 14 किलोमीटर के इस ट्रेक रूट पर 3.32 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी. इस ट्रेकरूट को विकसित करने के लिए प्रपोजल बनाकर मंजूरी के लिए सरकार को भेज दिया गया है. यह चोटी 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है.



क्यों विकसित होगा ट्रैकरूट
डीसी सिरमौर डॉक्टर आरके परुथी ने बताया कि चूड़धार समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. चूड़धार जाते हुए अक्सर पर्यटक रास्ते में भटक जाते हैं. ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी है. भविष्य में कोई इस तरह की घटना न घटे इसके लिए ट्रैकरूट विकसित किया जा रहा है. नोहराधार से लेकर चूड़धार तक जगह जगह वर्षा शालिका, हाथ रेलिंग, ट्रैकर्स हट, कैफेटेरिया, टॉयलेट बनाए जाएंगे, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सके. स्थल के विकसित होने से जहां श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिल पाएंगे. वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों की आमदनी में भी इजाफा होगा.



बड़ी संख्या में आते हैं श्रद्धालु

शिरगुल स्थली चूड़धार में न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है. श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जोरदार घाटी की राह कठिन होने के बावजूद यहां लगातार श्रद्धालु पहुंचते है. यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है. उम्मीद की जा रही है कि ट्रैक विकसित होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होगा.
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