पांवटा साहिब में अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी, करोड़ों के राजस्व का नुकसान

पांवटा साहिब के करीब आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है. अवैध रूप से नदियों से खनन सामग्री उठाई जा रही है.

Rajesh Kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 13, 2019, 11:49 AM IST
पांवटा साहिब में अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी, करोड़ों के राजस्व का नुकसान
पांवटा साहिब में अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे विभाग
Rajesh Kumar | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 13, 2019, 11:49 AM IST
विधानसभा क्षेत्र पांवटा साहिब के करीब आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है. अवैध रूप से नदियों से खनन सामग्री उठाई जा रही है. इससे न केवल प्रदेश सरकार को करोडों के राजस्व का चूना लग रहा है, बल्कि अवैज्ञानिक तरीके से नदियों से उठाई जा रही सामग्री के चलते बाढ़ और भूमि कटाव का खतरा भी पैदा हो रहा है.

प्रदेश सरकार अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लाख दावे कर ले, लेकिन वास्तव में अवैध रूप से चल रहे खनन के व्यवसाय पर थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा है. पांवटा साहिब में अभी भी अवैध खनन का कार्य जारी है. जिसपर जिला खनन विभाग सहित पुलिस व वन विभाग सहित अन्य सम्बंधित विभाग अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं.



पांवटा साहिब के इन क्षेत्रों में चल रहा है अवैध खनन का कार्य-

उपमंडल पांवटा साहिब के साथ लगती यमुना नदी में यमुना पुल , नवादा , रामपुरघाट ,भूपपुर आदि स्थानों पर अवैध रूप से नदी से खनिज सम्पदा पर डाका डल रहा है. यहां की गिरी नदी में भी अवैध खनन जारी है , गिरी नदी में बांगरण पुल , सतौन पुल के पास , रेणुका-सतौन  मार्ग के साथ लगती गिरी नदी में कई जगह अवैध खनन जोरो पर चल रहा है.

बाता नदी के किनारो से भी अवैध रूप से खनिज सम्पदा - रेत , बजरी , पत्थर आदि बिना अनुमति के उठाया जा रहा है. इसके अलावा हिमाचल उत्तराखंड की सीमा के साथ लगते खोदरी -माजरी, सहस्रधारा में भी अवैध रूप से खनन को अंजाम दिया जा रहा है, गर्मी के चलते सुबह, शाम व रात के समय खनन के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है.

विभाग की नाक तले अवैध खनन का कारोबार फलफूल रहा है-

रोजाना ट्रैक्टर-ट्राली के माध्यम नदी से अवैध खनन कर रेत, बजरी और पत्थर उठाए जा रहे हैं. दिन दिहाड़े सरकारी संपत्ति पर डाका डाला जा रहा है, लेकिन जिस विभाग पर इसकी सुरक्षा का जिम्मा है वो कुम्भकर्णी नींद सो रहा है. जिला खनन विभाग की नाक तले अवैध खनन का कारोबार फलफूल रहा है, लेकिन वर्षों से कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई.
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अवैध खनन को रोकने के लिए दर्जनों विभागों को सरकार ने जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन अन्य विभाग भी सरकारी सम्पति को लुटते देख रहे है. इससे हर वर्ष प्रदेश सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लग रहा है. अधिकतर सामग्री उत्तराखंड राज्य के लिए सप्लाई की जा रही है.

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