Politics of Himachal: क्यों BJP से बागी तेजतर्रार दयाल प्यारी कांग्रेस में शामिल हुई?

पीएम नरेंद्र मोदी के साथ दयाल प्यारी.

पीएम नरेंद्र मोदी के साथ दयाल प्यारी.

Politics of Himachal: कयास लगाए जा रहे है कि पच्छाद में लगातार तीन बार हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस यहां अब पार्टी में शामिल हुई दयाल प्यारी पर भी दांव खेल सकती है, जो की BJP के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

  • Share this:
नाहन. हिमाचल प्रदेश में सिरमौर (Sirmour) जिले से भाजपा (BJP) की पूर्व तेजतर्रार नेत्री और दलित चेहरा दयाल प्यारी (Dayal Pyari) ने गुरुवार को दिल्ली मुख्यालय में कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला (Rajeev Shukla) मौजूदगी में दयाल प्यारी ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. भाजपा से दरकिनार दयाल प्यारी पर कांग्रेस (Congress) ने बड़ा दांव खेला है. सिरमौर के पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली दयाल प्यारी के कांग्रेस में आने से कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.

दयाल प्यारी का रूतबा

सिरमौर जिले में पच्छाद में विधानसभा के उपचुनाव-2019 में बीजेपी से बगावत करने के बाद दयाल प्यारी ने विधानसभा चुनाव लड़ा था. हालांकि, उप-चुनाव में दयाल प्यारी तीसरे स्थान पर रही थी, लेकिन 21.56 प्रतिशत वोट हासिल कर अपनी ताकत का अहसास करवा दिया था. चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी भाजपा की रीना कश्यप को 22,048 वोट हासिल हुए थे, जबकि कांग्रेस के गंगूराम मुसाफिर ने 19,306 मत प्राप्त किए थे. दयाल प्यारी ने आजाद लड़ते हुए अकेले ही अपने दम पर उस समय 11,651 वोट हासिल किए थे, जब पूरी भाजपा सरकार ने उप चुनाव में जोर लगा रखा था.

गुरुवार को नई दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हुए दयाल प्यारी.

Youtube Video


कांग्रेस ने खेला दलित कार्ड  

कांग्रेस ने भी अब दयाल प्यारी को अपने पाले में लाकर दलित कार्ड खेला है. कांग्रेस के शीर्ष नेता गंगूराम मुसाफिर को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है. पच्छाद सीट पर भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगा दी थी. इस कारण कांग्रेस का काफी मनोबल गिरा हुआ था. अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली दयाल प्यारी ने उस समय भी इस बात का ऐलान कर दिया था कि वो 2022 का विधानसभा चुनाव लडेगी. तीन बार जिला परिषद का चुनाव जीत चुकी दयाल प्यारी एक बार जिला परिषद की चेयरपर्सन भी रही है. खास बात यह भी थी कि वो तीन अलग-अलग वार्डों से जिला परिषद का चुनाव जीती थी. दयाल प्यारी के काँग्रेस में शामिल होने के बाद पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदलते दिख रहे हैं. कयास लगाए जा रहे है कि पच्छाद में लगातार तीन बार हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस यहां अब पार्टी में शामिल हुई दयाल प्यारी पर भी दांव खेल सकती है, जो की BJP के  लिए एक बड़ी चुनोती होंगी. वैसे भी कांग्रेस नेता गंगूराम मुसाफिर का यहां से सियासी करियर लगभग खत्म हो चुका है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज