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हिमाचल के इस स्कूल के बच्चे वेस्ट मैटेरियल से बनाते हैं एक से बढ़कर एक खूबसूरत वस्तुएं

सिरमौर जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल दाड़ो देवरीया में कुछ भी अनुपयोगी वस्तुएं फेंकी नहीं जाती है.

सिरमौर जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल दाड़ो देवरीया में कुछ भी अनुपयोगी वस्तुएं फेंकी नहीं जाती है.

सिरमौर जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल दाड़ो देवरिया में कुछ भी अनुपयोगी वस्तुएं फेंकी नहीं जाती है. वेस्ट मैटेरियल और प्लास्टिक इत्यादि के उत्पाद तैयार करके स्कूल की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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सिरमौर. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले (Sirmaur District) के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल (Government Senior Secondary School) दाड़ो देवरिया (Dado Devariya) में कुछ भी अनुपयोगी वस्तुएं (Waste Material) फेंकी नहीं जाती है. वेस्ट मैटेरियल और वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक (Plastics) इत्यादि के उत्पाद तैयार करके स्कूल की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यहां स्कूल के नए भवन (New Buildings) के निर्माण के दौरान बचे अनुपयोगी लोहे की रॉड (Waste Rod) से जहां विद्यालय मे रखे फूलों के गमलों के लिए खूबसूरत स्टैंड बनाए गए हैं, वहीं मिड डे मील बनाने के लिए इस्तेमाल हाने वाले चूल्हे के लिए भी खूबसूरत स्टैंड बनाए गए हैं. इतना ही नहीं स्कूल में लगी रिटेनिंग वॉल को भी प्लास्टिक की खाली बोतलों को इधर उधर से इकट्ठा कर इसमें मिट्टी और रेत भर कर तैयार किया गया है.

प्लासिटक से बना रहे हैं सजावटी उत्पाद

आपको बता दें कि पढ़ाई के अलावा स्कूली बच्चों को पलास्टिक और अन्य वेस्ट मैटेरियल से कई तरह के सजावटी उत्पाद बनाने भी सिखाए जाते हैं. वहीं स्कूल मे बच्चों को यह भी बताया जाता है कि किस तरह से हम वेस्ट मैटेरियल का सही इस्तेमाल करके न सिर्फ खूबसूरत उत्पाद बना सकते हैं, बल्कि इस तरह के उत्पादों को इधर—उधर ना फेंक कर अपने आसपास के वातावरण को भी प्रदूषित होने से बचा सकते हैं. गौरतलब है कि इस स्कूल मे किए जाने वाले प्रयोगों की पूरे क्षेत्र मे स्कूल की सराहना होती है, वहीं इस तरह के किए जाने वाले कार्यों से अन्य स्कूलों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए.

Waste Materia-अनुपयोगी वस्तुएं
स्कूल के नए भवन के निर्माण के दौरान बचे अनुपयोगी लोहे की रॉड से जहां विद्यालय मे रखे फूलों के गमलों के लिए खूबसूरत स्टैंड बनाए गए हैं


स्कूल का उद्देश्य पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना है

स्कूल की प्रिंसिपल दिव्या ठाकुर ने बताया कि पढ़ाई के अलावा बच्चों को यह भी सिखाया जाता है कि आसपास पड़ी कोई भी वस्तु बेकार नहीं है. हम उसका उपयोग कर कई तरह की वस्तुएं बना सकते हैं. हम बच्चों को यह भी सिखाते हैं कि अगर उन्हें घर पर बेकार वस्तु मिलती है तो उसके स्कूल में ले आएं और यहां उससे उपयोगी उत्पादन बनाना सीखें. इससे ना केवल हमें खूबसूरत उत्पाद मिलेगा ​बल्कि हमारा पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा.



स्कूल की छात्रा स्नेहा ने बताया कि उनके स्कूल मे वेस्ट व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों से विभिन्न तरह के सजावटी उत्पाद बनाने सिखाए जाते हैं और हमारे स्कूल मे जो रिटेनिंग वॉल है उसे भी प्लास्टिक की बेकार बोतलों मे मिट्टी व रेत भर कर बनाया गया है जो काफी खूबसूरत लगता है.

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