ट्रांसफर रुकवाने के लिए बच्चों को बनाया हथियार, गाड़ियों में भरकर DC के पास भेजे

स्कूली बच्चों ने बताया कि वे अपनी मर्जी से परिजनों को जानकारी देकर आए हैं. इनका कहना है कि इन्हें सुशील कुमार इनके स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य चाहिए और उनके तबादले को रोका जाए, नहीं तो यह सोमवार को फिर से मंडी आएंगे.

Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 12, 2018, 8:31 PM IST
ट्रांसफर रुकवाने के लिए बच्चों को बनाया हथियार, गाड़ियों में भरकर DC के पास भेजे
मंडी लाए गए बच्चों से बात करते डीएसपी.
Virender Bhardwaj
Virender Bhardwaj | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 12, 2018, 8:31 PM IST
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के सीनियर सेंकेडरी स्कूल कोटली के प्रधानाचार्य ने तबादले को रुकवाने के लिए स्कूली बच्चों को हथियार बनाया. शुक्रवार को इस बात का खुलासा तब हुआ, जब स्कूल के छठीं से लेकर 12वीं कक्षा के 100 से अधिक बच्चे प्रधानाचार्य सुशील कुमार का तबादला रुकवाने के लिए डीसी मंडी के पास पहुंच गए.

इतनी अधिक संख्या में बच्चों के डीसी कार्यालय में पहुंचने पर हडकंप मच गया. बच्चे डीसी से मिले और अपनी बात रखी. डीसी मंडी ने भी बच्चों के साथ प्यार से बात करके उन्हें वापस जाने को कहा, लेकिन शिक्षा विभाग को इस मामले की जांच के आदेश दे दिए.

स्कूली बच्चों ने बताया कि वे अपनी मर्जी से परिजनों को जानकारी देकर आए हैं. इनका कहना है कि इन्हें सुशील कुमार इनके स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य चाहिए और उनके तबादले को रोका जाए, नहीं तो यह सोमवार को फिर से मंडी आएंगे.

अब सवाल यहां पर यह है कि अगर बच्चे परिजनों को बताकर आए थे तो स्कूल ड्रेस में स्कूल बैग के साथ मंडी क्यों पहुंचे और परिजनों ने इन्हें अकेले कैसे आने दिया. बच्चों ने यह भी बताया कि वह बस के माध्यम से मंडी आए हैं, जबकि बच्चों को टैक्सियां करके मंडी भेजा गया था.

परिजनों को जानकारी नहीं : प्रधान
कोटली स्कूल के एसएमसी प्रधान अरुण कुमार ने कहा कि किसी भी बच्चे के परिजन को इस बात की जानकारी नहीं थी. जब बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे तभी इसका पता चला.

बच्चे टैक्सियों के माध्यम से मंडी पहुंचाए गए और टैक्सी चालक यह बताने को तैयार नहीं हो रहे कि उन्हें किराया किसने दिया और मंडी बच्चों को ले जाने को किसने कहा. उन्होंने कहा कि बच्चों को राजनीतिक आधार पर इस्तेमाल किया गया है और इस बात की पूरी जांच होनी चाहिए. वहीं, मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा ने इस पूरे प्रकरण पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है.

मामले की जांच के आदेश : विभाग
उच्च शिक्षा उपनिदेशक अशोक शर्मा ने बताया कि बच्चे अपनी मर्जी से नहीं आए हैं, इन्हें बहला-फुसला कर मंडी लाया गया है. इस पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं और जांच अधिकारी को दो दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाही अम्ल में लाई जाएगी.

साढ़े तीन बाद प्रिंसिपल का तबादला
प्रधानाचार्य सुशील कुमार मूलतः सरकाघाट के रहने वाले हैं और इन्होंने मंडी शहर के साथ नेला में अपना घर बना लिया है. कोटली में यह बीते करीब साढ़े तीन वर्षों से तैनात थे. सरकार ने इनका तबादला दुर्गम क्षेत्र ब्रयोगी के लिए किया है और वहां के प्रधानाचार्य को कोटली में इनके स्थान पर भेजा है. ब्रयोगी से आए प्रधानाचार्य से बीते दिन कार्यभार संभाल लिया था और आज यह प्रकरण हो गया.
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